February 11, 2026

विंध्य न्यूज़

कहे सच बेहिचक

अधिकारियों ने सफाई नहीं कराने की खाई कसम,MIC सदस्य ने कहा स्वच्छता अभियान में कई करोड़ का भष्टाचार

सिंगरौली।नगर पालिक निगम क्षेत्र में साफ सफाई के लिए प्रतिमाह सिटाडेल को एक करोड़ 20 लाख के करीब दिया जा रहा है। लेकिन क्या इस खर्च का फायदा लोगों को हो रहा है या नहीं. तो सभी का जवाब यही रहता है कि नहीं। अब नगर निगम प्रशासक के एमआईसी सदस्य खुर्शीद आलम ने भाजपा सरकार और नगर निगम के अधिकारियों पर स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों ने सफाई नहीं करने की कसम खा रखी है।

वार्ड क्रमांक 43 के पार्षद और एमआईसी सदस्य खुर्शीद आलम ने भाजपा और नगर निगम अधिकारियों सहित सिटाडेल कंपनी पर सफाई के नाम पर पैसों का बंदरबांट करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सभी वार्डों में गंदगी का अंबार है सफाई कहीं नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के अधिकारी शिकायत करने के बाद भी सफाई नहीं कराते। ऐसा लगता है कि अधिकारी और ठेकेदार सफाई नहीं करने की कसम खाई है।

एम आई सी सदस्य ने आगे कहा शिकायत करने पर अधिकारियों का जवाब तो यही रहता है कि जल्द ही सफाई हो जाएगी लेकिन कभी साफ सफाई होता नहीं है। उन्होंने सिटाडेल कंपनी पर आरोप लगाते हुए कहा कि हमारे वार्ड में ही दूसरे दिन कचरे की गाड़ी पहुंच रही है। कंपनी कितनी गाड़ियां लगाई है यह रहस्य बना है। शहर मे जगह जगह गंदगी को देखकर तो यही लगता है की नगर निगम और ठेकेदार भले ही हर महीने करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं लेकिन सफाई से इनका कहीं दूर-दूर से कोई लेना देना नहीं है। 

शहर में फैली गंदगी बता रही हकीकत 
एमआईसी सदस्य खुर्शीद आलम ने कहा कि शहर में साफ सफाई की स्थिति अगर जानना हो तो मुख्य सड़क को छोड़कर किसी वार्ड में चले जाइये। जमीनी हकीकत मालूम पड़ जाएगी। शहर की सफाई सिर्फ कागजों में हो रही है सफाई हो रही है तो खातों में रखे पैसों की सफाई हो रही है। एक कंपनी को 45 वार्डों की साफ सफाई का जिम्मा सिर्फ इसलिए दिया गया है ताकि करोड़ों रुपए का बंदर बाट करने में सहूलियत रहे। 

ठेकेदार की मनमानी या कमिश्नर की मिली भगत ?
भाजपा और नगर निगम प्रशासन ने ठेकेदारी प्रथा को आगे बढ़ाते हुए साफ सफाई का जिम्मा प्राइवेट हाथों को सौंपा है.स्वच्छता का दंभ भरने वाली सरकार किसी वार्ड के कॉलोनियों में जाकर देख ले वहां नालियां बजबजा रही हैं. मुख्य मार्ग के भीतर की गलियों में गंदगी के कारण चौक और चौराहे पटे पड़े हैं. स्वच्छता कार्य सिर्फ कागजों में होता है. 

सफाई के लिए विभागों ने अपनी आंखें मूंद ली है.कौन है गंदगी का जिम्मेदार ? इसे ठेकेदार की मनमानी कहे या नगर निगम कमिश्नर की मिलीभगत,क्योंकि बिना इन दो कारणों के शहर कॉलोनियां इतनी गंदी नहीं हो सकती हैं. एक ओर स्वच्छता अभियान चलाकर साफ सफाई की बात कही जा रही है.वहीं दूसरी ओर जिनके सिर पर कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी है,वो ही दूसरी फिराक में व्यस्त हैं। 

About The Author