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UGC New Rules: मैं अभागा सवर्ण हूं, मेरा रोंआ-रोंआ उखाड़ लो राजा, UGC के नियमों पर छलका कुमार विश्वास का दर्द

UGC Row: यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने एक नया नियम बनाया है. इस नए नियम को लेकर देश भर में बवाल बढ़ता ही जा रहा है. यूजीसी के नये नियमों पर कवि कुमार विश्वास का दर्द छलका है. कुमार विश्वास ने #UGC_RollBack हैशटैग के साथ अपने विरोध का संकेत दिया है.यूजीसी नियमों पर कुमार विश्वास ने दिवंगत कवि रमेश रंजन की एक कविता साझा की है. इसकी पंक्तियों में लिखा है, चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा सवर्ण हूं मेरा, रोंया रोंया उखाड़ लो राजा…

बता दें कि, विश्व विद्यालय अनुदान आयोग के नए उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026 (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) को लागू किया जिसके बाद यूजीसी को लेकर देशभर में विवाद गहरा गया है. अब इस मामले में कवि कुमार विश्वास की भी इंट्री हो चुकी है। कुमार भी यूजीसी के इस नियम के खिलाफ हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा है. यह पोस्ट रमेश रंजन मिश्र की कविता है. उस पोस्ट में लिखा है-चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा.’ इस पोस्ट के साथ कुमार विश्वास ने #UGC_RollBack लिखा है. इसका मतलब है कि वह भी चाहते हैं कि सरकार यह नियम वापस लें.

हालांकि इस मु्द्दे पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे आशंकाओं को निराधार बेबुनियाद बता चुके हैं. उन्होंने कहा है कि हर समाज का ख्याल रखा गया है और किसी के साथ भी भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने पूर्व में सरकार के कमजोर आय वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण की याद भी दिलाई है. वहीं समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने विरोध जताया है और कहा है कि केंद्र सरकार जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाला कानून लाएगी तो सड़क से संसद तक विरोध किया जाएगा. वहीं UGC हेडक्वार्टर पर छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है. यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण आर्मी के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं.सवर्ण आर्मी के को फाउंडर शिवम सिंह का कहना है कि इन नियमों को तुरंत वापस लिया जाए. नियम लाकर सरकार फूट डालने का काम कर रही है.

यूजीसी का कहना है कि ये नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हैं. नियमों के मुताबिक हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी. ये कमेटी एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी. कमेटी में एससी-एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना जरूरी है. कमेटी का काम कैंपस में बराबरी का माहौल बनाना और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए योजनाएं लागू करना है.

क्या है यूजीसी का नया नियम

यूजीसी के नए नियमों के तहत देशभर के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एंटी रैगिंग गाइडलाइंस को सख्ती से लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है। हर संस्थान को एंटी रैगिंग कमेटी और स्क्वॉड का गठन करना होगा, छात्रों से एंटी रैगिंग शपथ पत्र लेना होगा और परिसर में रैगिंग रोकने के लिए नियमित निगरानी करनी होगी। यूजीसी ने साफ कहा है कि यदि किसी संस्थान में रैगिंग, हिंसा या आत्महत्या जैसा गंभीर मामला सामने आता है तो उस विश्वविद्यालय के खिलाफ गहन जांच की जाएगी, संबंधित अधिकारियों को समन जारी किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर संस्थान की मान्यता रद्द करने, प्रवेश पर रोक लगाने या आर्थिक दंड जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही छात्रों को रैगिंग की शिकायत करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल और हेल्पलाइन की सुविधा देना भी संस्थानों की जिम्मेदारी तय की गई है, ताकि किसी भी तरह की उत्पीड़न की घटना को समय रहते रोका जा सके।

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