February 11, 2026

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सिंगरौली नगर निगम में धराशायी हुई कचरा प्रबंधन योजना, नही हो रहा कचरे का निस्तारण

सिंगरौली। नगर पालिका निगम सिंगरौली ने इंदौर की सिटाडेल कंपनी को नवंबर 2020 में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत घर-घर कचरा उठाने और निस्तारण कब काम सौंपा तब से लेकर अब तक करीब 4 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कंपनी ने कचरा निस्तारण के दिशा पर कोई सुधार नही किया है। यहां कचरा प्रबंधन योजना धराशाई हो गई है। गनियारी में हजारो टन से ज्यादा का कचरा का पहाड़ खड़ा हो गया है। कचरे का यह पहाड़ नगर निगम अधिकारियों के लिए बड़ा धब्बा है।

गौरतलब है कि प्रशासन ने करोड़ों  रुपये की लागत से नगर निगम क्षेत्र के गनियारी वार्ड में स्थापित कचरा प्रोसेसिंग यूनिट डब्ल्यूपीयू  में प्रोसेसिंग के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। इसके कारण प्रतिदिन शहर से निकलने वाले कचरे को गनियारी प्लांट के बगल में डंप किया जा रहा है। वहीं कचरा डंप करने और इसमें आग लगा देने से शहर की हवा खराब हो रही है। इसका असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है। शहर से निकले हजारों टन कचरे के प्रबंधन को लेकर लगभग चार साल पूर्व नगर निगम प्रशासन ने करोड़ों रुपये की लागत से शहर के गनियारी वार्ड में कचरा प्रबंधन यूनिट स्थापित की थी। यूनिट में गीले एवं सूखे कचरा को प्रोसेसिंग करने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से मशीन की खरीदारी भी की गयी थी। कचरे के पृथककरण के लिए अलग-अलग शेड भी बनाया गया था,  लेकिन इसका फायदा नही मिल पा रहा है।

कचरे का खड़ा कर दिया पहाड़
नगर निगम क्षेत्र में घर-घर कूड़ा उठाने में जहां लापरवाही बढ़ती जा रही है, तो वही कचरा प्लांट से लगे खुली बाउंड्री में कचरे का पहाड़ खड़ा कर दिया है। कचरे के ढेर में खाने की तलाश में मवेशी सिंगल यूज प्लास्टिक और मेडिकल बेस्ट खाकर काल के गाल में समा रहे हैं और जिम्मेदार कागजों में शत-प्रतिशत कचरे का संग्रहण और निस्तारण दिखा रहे हैं। यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो ठेकेदार सहित अधिकारी बेनकाब हो जाएंगे। नगर निगम इस समय कचरा उठाओ और संग्रहण में प्रतिमाह एक करोड़ 30 लाख रुपए खर्च कर रही है।

नोडल अधिकारी और रविंद्र ने बनाई अकूत संपत्तियां
सिटाडेल कंपनी के कार्यकाल में सबसे अधिक समय तक वर्तमान कार्यपालक यंत्री व्हीपी उपाध्याय नोडल अधिकारी रहें। वर्तमान में भी यही नोडल अधिकारी हैं। नोडल अधिकारी व्हीपी उपाध्याय रिटायर होने के कगार में है। इनके द्वारा निर्माण कार्यों सहित घर-घर कचरा संग्रहण और निस्तारण में व्यापक पैमाने पर अनियमितता की गई है। अनियमितता के मामले लोकायुक्त में भी विचाराधीन है। सूत्रों का दावा है कि नोडल अधिकारी और सिटाडेल के कर्ताधर्ता रावेंद्र सिंह कचरा संग्रहण और निस्तारण में हेर फेर करके अकूत संपत्तियां बना ली है। चर्चा हैं कि यदि इनकी चल और अचल संपत्ति की जांच की जाए तो आय से अधिक संपत्ति मिल सकती है।

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