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पुलिस और आबकारी विभाग के रहमो करम पर फल फूल रहा शराब माफिया का काला कारोबार

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नेशनल हाइवे,व स्टेट हाइवे से दूरी के नियम का भी नहीं दिया जा रहा है ध्यान, गांव गांव में अवैध शराब की बिक्री के जरिए हो रही लाखों के कर की चोरी

देवसर । सिंगरौली जिले के देवसर अनुभाग अंतर्गत लंबे समय से फल फूल रहे शराब के अवैध कारोबार पर पुलिस व आबकारी विभाग मेहरबान नजर आता है जहां तमाम नियम कायदों को दरकिनार करते हुए शराब की दुकानें संचालित हैं क्योंकि शराब दुकान संचालन के नियम को दरकिनार करते हुए ना ही समय का ध्यान रखा गया और ना ही रेट सूची और स्टाफ का विवरण अंकित किया जाता तथा मनमानी तौर पर एक किराना दुकान की तरह दुकान का संचालन हो रहा है की किराना दुकान संचालन में भी नियम कायदे बनाए जाते हैं ।

जानकारों की मानें तो आपकारीअधिनियम के तहत शराब दुकान का संचालन राष्ट्रीय राजमार्ग से 500 मीटर की दूरी तथा स्टेट हाइवे से 250 मीटर की दूरी तय की गई है। लेकिन देवसर क्षेत्र में स्थित शराब की दुकानें स्टेट हाइवे से 50 फिट और नेशनल हाइवे से मात्र 200 फिट की दूरी पर स्थित होने के कारण आबकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। वहीं आबकारी अधिनियम के तहत स्टेट हाइवे ,नेशनल हाईवे पर खुली दुकान की लोकेशन स्थान के अनुसार तय की जाती है किंतु किंतु यह तो विभाग ही जाने की यहां लोकेशन किशोर और तय की गई है लेकिन यहां साफ तौर पर देखा जा सकता है कि सीधे-सीधे बस्ती और रोड की तरफ है ।

ठेकेदार सभी सभी शराब दुकानों को आगे कर दिया गया है। नियमानुसार शराब की दुकान मंदिरों व चिकित्सालयों के आसपास व रिहायशी तथा सार्वजनिक क्षेत्र में नहीं होना चाहिए लेकिन यहां संचालित शराब की दुकानें रिहायशी व्यवसायिक स्थानों में स्थित है। आमलोग इन शराब दुकानों से परेशान है । इन दुकानों को हटाने की मांग भी की जाती है। लेकिन शराब दुकानें नहीं हटती। ऐसे में हाइवे किनारे से शराब दुकाने हटाने के यथाशीघ्र आदेश होने चाहिए जिससे कि रिहायशी और व्यवसायिक क्षेत्र के लोगों को परेशानी ना हो । अब ऐसे में रिहायशी व व्यवसायिक क्षेत्र में खुली मदिरा की दुकानें लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं। जिन्हें तत्काल हटाने की मांग की जा रही है । तो वहीं दूसरी ओर नई आबकारी नीति 2022 23 के तहत सरकार द्वारा 20 फ़ीसदी तक सराब के दर में छूट प्रदान की गई है किंतु यहां ठेकेदार द्वारा मनमानी दर पर शराब बिक्री की जाती है साथ ही क्षेत्र के प्रत्येक गांवों के हर मोहल्लों में बिक्री की जा रही शराब का कोई लेखा-जोखा नहीं है जिससे साफ जाहिर होता है कि ठेकेदार द्वारा लाखों की कर चोरी की जा रही है ।

महत्वपूर्ण तथ्य तो यह भी है कि यहां शराब दुकानों में ना ही रेट सूची चस्पा की गई है ,और ना शराब के स्टाक का विवरण है, ना ही दुकान खोलने और बंद करने का समय निर्धारण किया गया है । यहां ऐसा प्रतीत होता है की शराब ठेकेदार पर सिंगरौली जिले का आबकारी अमला पूरी तरह से मेहरबान नजर आता है । या यह कहें कि शराब माफियाओं के इशारों पर आपकारी अमला नाचने को विवश है तो गलत न होगा ! ।

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