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CM Mohan Yadav का सख्त मूड, 55 जिलों में कभी भी उतर सकता हेलीकॉप्टर, उपार्जन केंद्रों पर मचेगी हलचल


भोपाल : प्रदेश में गेहूं उपार्जन व्यवस्था को लेकर अब सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ संकेत दे दिए हैं कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री आने वाले दिनों में प्रदेश के 55 जिलों के उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे। खास बात यह है कि उनका हेलीकॉप्टर कभी भी, कहीं भी उतर सकता है, जिससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री स्वयं उपार्जन केंद्रों पर पहुंचकर किसानों से सीधे संवाद करेंगे और जमीनी हकीकत जानेंगे। वे यह परखेंगे कि सरकार द्वारा तय की गई सुविधाएं—जैसे पीने का पानी, छायादार स्थान, तौल कांटे, बारदाना और भुगतान व्यवस्था—वास्तव में किसानों तक पहुंच रही हैं या सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। पिछले कुछ समय से उपार्जन केंद्रों पर अव्यवस्था, देरी और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही थीं, जिस पर अब मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपना लिया है।

सरकार ने इस बार उपार्जन प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए कई बड़े फैसले भी लागू किए हैं। गेहूं खरीदी की दर 2585 रुपये प्रति क्विंटल के साथ 40 रुपये बोनस जोड़कर 2625 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई है। साथ ही, तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 की गई है और जरूरत पड़ने पर इसे और बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। स्लॉट बुकिंग की क्षमता भी बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रति केंद्र कर दी गई है, जिसे जिलों को 3000 क्विंटल तक करने की छूट दी गई है।

मुख्यमंत्री के इस अचानक निरीक्षण कार्यक्रम ने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। अब देखना यह होगा कि यह सख्ती जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाती है या फिर यह भी कुछ समय बाद महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि सीएम के इस कदम से उपार्जन केंद्रों पर हलचल तेज हो गई है और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होने वाली है।

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