Challenge to DGP’s order : मध्यप्रदेश पुलिस महकमे में एक बार फिर तबादला उद्योग की गूंज तेज हो गई है। डीजीपी के स्पष्ट आदेश के बावजूद एक सब इंस्पेक्टर का सिस्टम को चुनौती देना यह दिखाता है कि वर्दी के भीतर भी सियासी रसूख और पैसों का खेल किस कदर हावी है। सवाल यह है कि क्या अब आदेश नहीं, बल्कि जुगाड़ तय करेगा कि कौन कहां तैनात रहेगा?
दरअसल 3 जुलाई को पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना द्वारा सिंगरौली से सतना के लिए चार सब इंस्पेक्टरों के तबादले के आदेश जारी किए गए थे। सिंगरौली एसपी नियाज़ केएम ने तत्परता दिखाते हुए 4 जुलाई को सभी एसआई को रिलीव भी कर दिया। लेकिन अब यह मामला महज तबादले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, तबादला रुकवाने के लिए एक संबंधित एसआई एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। कोई राष्ट्रीय स्तर की सिफारिश जुटाने में लगा है, वह भोपाल में अपने आकाओं के दरबार में हाजिरी लगा रहा है। चर्चा यहां तक है कि आदेश पलटवाने के लिए हर कीमत चुकाने की तैयारी है।
यह पूरा घटनाक्रम कांग्रेस के उस आरोप को भी हवा देता है, जिसमें भाजपा सरकार पर तबादला उद्योग चलाने की बात कही जाती रही है। आरोप है कि पहले तबादले किए जाते हैं, फिर मोटी रकम लेकर उन्हें निरस्त कराया जाता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या डीजीपी का आदेश भी इस दबाव और लेन-देन के आगे टिक पाएगा? या फिर एक बार फिर सिस्टम के भीतर चल रही अदृश्य ताकतें फैसलों को पलट देंगी? अगर ऐसा हुआ, तो यह सिर्फ एक तबादले का मामला नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस महकमे की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार होगा।