सिंगरौली। पुलिस महकमे में तबादला अब सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कर्मचारियों की जिंदगी और मानसिक स्थिति से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। स्पेशल ब्रांच में पदस्थ प्रधान आरक्षक राकेश गंगले की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मामले में सामने आए कथित सुसाइड नोट ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रविवार रात एसबी कार्यालय के कमरे में प्रधान आरक्षक का शव फंदे पर लटका मिला, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचे और तहसीलदार की मौजूदगी में शव को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि मृतक के पास से एक कथित सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने अपने गृह जिले खरगोन या आसपास स्थानांतरण की मांग को लेकर बार-बार पुलिस मुख्यालय भोपाल में आवेदन देने की बात लिखी है। बावजूद इसके, उन्हें किसी तरह की राहत नहीं मिली। लंबे समय तक परिवार से दूर रहने और लगातार मानसिक तनाव झेलने का जिक्र भी नोट में किया गया है।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या पुलिस मुख्यालय में कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने और समाधान करने की कोई प्रभावी व्यवस्था है? क्या बार-बार आवेदन देने के बावजूद किसी कर्मचारी की पीड़ा को नजरअंदाज किया जाना सिस्टम की नाकामी नहीं है? आखिर कब तक कर्मचारी परिवार से दूर रहकर मानसिक दबाव में काम करते रहेंगे?
मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि प्रदेश में लंबे समय से तबादला नीति को लेकर असंतोष की स्थिति बनी हुई है। कई कर्मचारी वर्षों से अपने गृह जिले से दूर पदस्थ हैं और उनकी समस्याएं अनसुनी रह जाती हैं। राकेश गंगले की मौत ने इस मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
इनका कहना है
इस मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। घटना के बाद परिजनों को सूचना दे दी गई है। सुसाइड नोट मिला है, जिसमें लिखी बातों के आधार पर जांच की जा रही है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
— ललित बैरागी, सीएसपी, विन्ध्यनगर