एक महीना छह दिन से प्रभारी विहीन संवेदनशील चौकी, तबादला रोकने की चर्चाओं के बीच राजनीतिक रसूख पर उठे सवाल
सिंगरौली। सीएम मोहन यादव जी प्रभारी मंत्री संपत्तिया उइके के दो दौरों के बाद भी सिंगरौली की संवेदनशील जयंत चौकी को प्रभारी नहीं मिल पाया। 25 जुलाई के बाद 9 अगस्त को भी मंत्री जिले में आईं और समीक्षा बैठक कर वापस चली गईं, लेकिन जयंत चौकी की खाली कुर्सी जस की तस रही। खास बात यह रही कि मीडिया ने जब चौकी की स्थिति और अटके तबादले को लेकर सवाल किया तो प्रभारी मंत्री कई सवालों पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय आगे बढ़ती नजर आईं। मंत्री के दो दौरों के बाद भी समाधान नहीं निकलने से अब सवाल चौकी से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रभाव और कथित ‘तबादला उद्योग’ तक पहुंच गया है।
जयंत चौकी मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश सीमा से जुड़ी महत्वपूर्ण पुलिस चौकी है। जिला बनने के बाद पहली बार इतने लंबे समय तक चौकी प्रभारी विहीन रहने की स्थिति सामने आने की चर्चा है। एक महीना छह दिन से प्रभारी की कुर्सी खाली है। दूसरी तरफ पूर्व प्रभारी के तबादले को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। सूत्रों के अनुसार, तबादला रोकने के लिए प्रभावशाली स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि चौकी में मौजूद पुलिस अधिकारी प्रभारी बनने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
यही खींचतान अब पुलिस विभाग में चलने वाले कथित तबादला उद्योग पर सवाल खड़े कर रही है। यदि तबादला आदेश जारी हुआ था तो उसका पालन क्यों नहीं हुआ? यदि कोई प्रशासनिक अड़चन है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? संवेदनशील सीमा चौकी को लंबे समय तक प्रभारी विहीन रखने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
इसी बीच जयंत क्षेत्र में कथित अवैध वसूली की चर्चाएं भी मामले को और संवेदनशील बना रही हैं। सूत्रों के मुताबिक डीकेडी कारोबार, कोयला, कबाड़, डीजल, ओवरलोड वाहनों और अवैध शराब से जुड़े मामलों में कथित वसूली की बातें कही जा रही हैं। इन चर्चाओं में एएसआई रवि गोस्वामी और सिपाही अमृत सिंह के नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अब सवाल साफ है, जयंत चौकी को प्रभारी कब मिलेगा और अटके तबादले पर फैसला कौन करेगा? मंत्री के दो दौरों के बाद भी जवाब नहीं मिलने से मामला प्रशासनिक देरी से ज्यादा राजनीतिक रसूख और कथित तबादला उद्योग की बहस बनता जा रहा है।
आलेख – नवीन मिश्रा- सिंगरौली