सिंगरौली। सरकारी आयोजनों में बच्चों को अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाने वाले जिम्मेदार अधिकारी जब उन्हीं बच्चों की बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखने में चूक जाएं, तो सवाल उठना लाजिमी है। चितरंगी में तिरंगा यात्रा के दौरान सामने आया मामला इसी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। छात्रों के मुताबिक मंत्री के इंतजार में उन्हें करीब एक घंटे तक तेज धूप और उमस में खड़ा रहना पड़ा। न पर्याप्त पानी मिला, न नाश्ते की समुचित व्यवस्था। यात्रा शुरू होने के बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ गई और देखते ही देखते 12 छात्र-छात्राओं को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना पड़ा।
बताया गया कि बुधवार सुबह करीब 9 बजे चितरंगी में तिरंगा यात्रा आयोजित की गई थी। इसमें सांदीपनि विद्यालय, सरस्वती विद्यालय, एक्सीलेंस स्कूल सहित आठ स्कूलों के 200 से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हुए। छात्रों का कहना है कि उन्हें करीब छह किलोमीटर पैदल चलकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचना पड़ा। इसके बाद मंत्री के आने के इंतजार में काफी देर तक धूप में खड़ा रहना पड़ा।
11वीं के छात्र मनोज सिंह चौहान के मुताबिक, बच्चों को इस दौरान पर्याप्त पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया। यात्रा शुरू होने के बाद छात्राएं चक्कर खाकर गिरने लगीं और कई अन्य बच्चों ने कमजोरी की शिकायत की। एक छात्रा को सांस लेने में भी परेशानी हुई। स्थिति बिगड़ने पर शिक्षकों ने बच्चों को ऑटो से अस्पताल पहुंचाया।
ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. हरिशंकर बस ने बताया कि 12 बच्चे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। उपचार के बाद करीब एक घंटे में सभी को छुट्टी दे दी गई। एक छात्र को पुरानी मेडिकल हिस्ट्री के कारण ऑक्सीजन भी देनी पड़ी।
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी ने कहा कि तिरंगा यात्राओं के लिए स्थानीय एसडीएम को नोडल अधिकारी बनाया गया था और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी केवल बच्चों को भेजने की थी। वहीं मंत्री राधा सिंह ने किसी लापरवाही से इनकार करते हुए तेज धूप को बच्चों की तबीयत बिगड़ने की वजह बताया।
अब सवाल यह है कि जब 200 से अधिक बच्चे सरकारी आयोजन में बुलाए गए थे, तो उनकी सुरक्षा, पानी और स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी? बच्चों के अस्पताल पहुंचने के बाद जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने के बजाय क्या प्रशासन इसकी जवाबदेही तय करेगा?