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सेवानिवृत्ति पर सम्मान,लेकिन आदर आधा! CSP का ‘वन-हैंड कल्चर’ ट्रोलर्स के निशाने पर

धार्मिक परंपरा गई तेल लेने? सीएसपी का एक हाथ, संस्कारों को लगा आघात

सिंगरौली : लंबे समय से परंपरा चली आ रही है कि विभागों में जब कोई अधिकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति होता है वरिष्ठ अधिकारी सम्मानपूर्वक सालश्रीफल नरियल देकर सम्मान पूर्वक विदाई देते हैं। और उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं। लेकिन जिले में पुलिस विभाग का एक सम्मान समारोह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। वजह सम्मान नहीं, बल्कि सम्मान देने का तरीका है।

बता दे कि सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र यादव आज सेवानिवृत हो गए। उनके सम्मान में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सम्मान समारोह का कार्यक्रम आयोजित किया गया। सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर को विदाई के दौरान सीएसपी पुन्नू सिंह परस्ते ने नारियल एक हाथ से सौंप दिया। और बाकायदा इसका फोटो खींचबाते हुए खबर के लिए मीडिया कर्मियों को दी गई । बस क्या था—वीडियो वायरल हुआ और परंपरा-संस्कृति की पाठशाला सोशल मीडिया पर शुरू हो गई।लोगों ने कहा, “जिस कर्मचारी ने 30 साल सेवा दी, उसको विदाई में आधा आदर? यह सम्मान था या औपचारिकता की खानापूर्ति?”

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भारतीय परंपरा में किसी को भेंट देते समय दोनों हाथों का उपयोग केवल रस्म नहीं, संस्कार है। गुरु-शिष्य से लेकर देव-पूजन तक, हम दोनों हाथ जोड़ते हैं—सम्मान, समर्पण और भाव का प्रतीक। लेकिन लगता है सीएसपी साहब “वन-हैंड कल्चर” में ज्यादा विश्वास रखते हैं।

धर्म कहता है —
“हस्तद्वयेन दानं श्रेय:”
(दो हाथों से दिया गया दान/सम्मान ही श्रेष्ठ है)

संस्कार कहते हैं —
आदर आधा नहीं होता।

नेतृत्व कहता है —
सीख उदाहरण से दी जाती है, भाषण से नहीं।

इधर जनता कह रही है —
“सीएसपी साहब, मन से सम्मान दीजिये… एक हाथ से नारियल देकर अपमान तो मत कीजिए।

कहते हैं एक तस्वीर हजार शब्द बोलती है, और यहां एक हाथ ने हजार सवाल खड़े कर दिए। सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर के चेहरे की विनम्र मुस्कान शायद बहुत कुछ कह गई — सेवा पूरी, सम्मान अधूरा। संयोग से यह देश वह है जहां हम भगवान को भी दोनों हाथ से प्रसाद चढ़ाते हैं… लेकिन अफ़सोस, आज एक कर्मयोगी को आधे हाथ का सम्मान मिला। अब सोशल मीडिया सवाल पूछ रहा है — “सीएसपी साहब, अगली बार आशीर्वाद भी आधे हाथ से देंगे?”सच यही है — सम्मान वस्तु नहीं, भावना है… और भावना कभी आधी नहीं होती।

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