MP News । ट्रांसफर सीजन खत्म होने के बाद पुलिस मुख्यालय भोपाल से जारी एकल तबादला आदेश ने पुलिस महकमे में हलचल बढ़ा दी है। सामान्य तौर पर तबादला आदेशों में कई अधिकारियों-कर्मचारियों के नाम सामने आते हैं, लेकिन इस बार जारी आदेश में सिर्फ एक ही नाम है। वह भी किसी सामान्य प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा नहीं, बल्कि पुलिस महानिदेशक स्तर से जारी आदेश के जरिए नीमच पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ शीघ्रलेखक भानु प्रताप राठौर को तत्काल प्रभाव से पुलिस मुख्यालय भोपाल की कार्मिक शाखा में आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से पदस्थ किया गया है। आदेश जारी होते ही राजनीतिक और विभागीय चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
मिली जानकारी के अनुसार नीमच पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पिछले करीब 7 साल से जमीन शीघ्र लेखक भानु प्रताप सिंह राठौर का पत्ता साफ कर दिया है। पीएचक्यू द्वारा जारी आदेश के मुताबिक भानु प्रताप राठौर को प्रशासनिक दृष्टिकोण से तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक कार्मिक शाखा पुलिस मुख्यालय भोपाल स्थानांतरित कर पदस्थ किया गया है। साथी आदेश जारी होने के दिनांक से उन्हें भार मुक्त भी कर दिया दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, एक मंत्री की शिकायत के बाद यह कार्रवाई सामने आई है। शिकायत में कथित तौर पर स्टेनो पर काम से ज्यादा राजनीति में सक्रिय रहने और क्षेत्र के माहौल को प्रभावित करने जैसे आरोप लगाए गए थे। हालांकि शिकायत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विभाग की ओर से तबादले का कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।

PHQ के आदेश ने बढ़ाई चर्चा
पुलिस मुख्यालय से जारी आदेश में भानु प्रताप राठौर, शीघ्रलेखक, कार्यालय पुलिस अधीक्षक जिला नीमच को प्रशासनिक दृष्टिकोण से तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक कार्मिक शाखा, पुलिस मुख्यालय भोपाल स्थानांतरित कर पदस्थ किए जाने का उल्लेख है। साथ ही आदेश जारी होने की तारीख से उन्हें कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि ट्रांसफर सीजन समाप्त होने के बाद अचानक सिर्फ एक कर्मचारी का तबादला आदेश क्यों जारी किया गया? क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है या किसी शिकायत के बाद लिया गया विशेष निर्णय? यही सवाल अब पुलिस महकमे के भीतर भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
‘काम कम, राजनीति ज्यादा’ की शिकायत?
सूत्रों का दावा है कि शिकायत में स्टेनो की कथित राजनीतिक सक्रियता को लेकर आपत्ति जताई गई थी। हालांकि इन आरोपों पर भानु प्रताप राठौर का पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों को सत्य मानने के बजाय विभागीय रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल एक कर्मचारी, एक आदेश और सीधे PHQ भोपाल में पदस्थापना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि तबादला महज प्रशासनिक कारणों से हुआ है तो विभाग कारण स्पष्ट करे, और यदि शिकायत कार्रवाई का आधार बनी है तो शिकायत की वास्तविक स्थिति भी सामने आनी चाहिए। सवाल यही है—ट्रांसफर सीजन खत्म होने के बाद यह ‘वन मैन ट्रांसफर’ आखिर किस कहानी की ओर इशारा कर रहा है?