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PHE कार्यपालन यंत्री का निलंबन फिर 13 दिन बाद बहाली, मंत्री के ज़िले में निलंबित EE से सरकार की हो रही बदनामी

सिंगरौली : जल जीवन मिशन के तहत कार्यपालन यंत्री त्रिलोक सिंह बरकड़े का निलंबन और फिर 13 दिन बाद बहाली पर कई सवाल उठ रहे हैं। बरकड़े को 24 अप्रैल को मुख्य अभियंता कार्यालय भोपाल से निलंबित किया गया था, क्योंकि जल जीवन मिशन के कार्यों में प्रगति नगण्य थी। हालांकि, उन्होंने निलंबन के खिलाफ अभ्यावेदन प्रस्तुत किया और 7 मई को उन्हें बहाल कर सिंगरौली खंड में पदस्थ कर दिया गया।

प्रदेश सरकार के केबिनेट लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग म.प्र. शासन भोपाल सम्पतिया उईके विभाग का यह मसला है। पीएचई मंत्री को सिंगरौली के प्रभारी मंत्री भी हैं। जहां इन दिनों पीएचई विभाग चर्चाओं में बना हुआ है। वही सीधी से   निलंबित निलंबित कार्यपालन यंत्री बरकड़े को 13 दिन के अंदर बहाल कर सिंगरौली खण्ड का जिम्मा सौप दिया जाए , यह चर्चा का विषय बना हुआ है। आखिर कार इस बात की चर्चाएं हो रही हैं कि निलंबित कार्यपालन यंत्री कौन ऐसा जादू किया कि एक खुद के अभ्यावेदन में सब कुछ ठीक-ठाक हो गया। कहीं न कहीं विपक्षी दलों को सरकार के खिलाफ बोलने के लिए मौका जरूर मिल गया है। निलंबित कार्यपालन यंत्री त्रिलोक सिंह बरकड़े के कार्य प्रणाली से सरकार की बदनामी हो रही है।

सवालों के घेरे में:

जल जीवन मिशन के कार्यों में प्रगति नगण्य होने के बावजूद बरकड़े को 13 दिन में बहाल क्यों किया गया?बरकड़े को सीधी-सिंगरौली में ही क्यों पदस्थ किया जाता है?क्या बरकड़े के निलंबन और बहाली के पीछे कोई राजनीतिक दबाव था?

आवश्यक कार्रवाई:

जल जीवन मिशन के कार्यों की प्रगति की जांच होनी चाहिए। बरकड़े के निलंबन और बहाली के कारणों की जांच होनी चाहिए। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए

पेयजल समस्या:

सिंगरौली में पेयजल समस्या गंभीर है। कई गांवों में हैंडपंप और राइजर पाइप के अभाव में पानी की किल्लत है। कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला ने पेयजल समस्या को लेकर गंभीरता दिखाई है और बिगड़े हैंडपंपों की मरम्मत एवं टैंकरों से पेयजल आपूर्ति कराई है। फिर भी, जिले में पेयजल की स्थिति सुधरने में समय लग सकता है.

जोगियानी गांव की समस्या:

सिंगरौली के जोगियानी गांव में आदिवासी समुदाय के लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। गांव में लगभग 150 लोग रहते हैं, जिनमें गोंड और बैगा जनजाति के परिवार शामिल हैं। ग्रामीणों को मजबूरन नाले के पास बने गड्ढे का दूषित पानी पीना पड़ता है। इससे उनकी सेहत पर खतरा मंडरा रहा है.

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सिंगरौली जिले को कौन चला रहा

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