सिंगरौली। करोड़ों रुपये खर्च करने के दावों के बीच बगदरा अभयारण्य क्षेत्र की जमीनी हकीकत सरकार और प्रशासन के विकास मॉडल पर करारा तमाचा मार रही है। 70 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च होने के बावजूद 26 ग्राम पंचायतों की सड़कें आज भी दलदल, गड्ढों और कीचड़ में दबी हुई हैं। हालात इतने बदतर हैं कि जहां सड़कें लोगों को राहत देने के लिए बननी चाहिए थीं, वहीं अब वही रास्ते ग्रामीणों के लिए रोजाना खतरे का कारण बन गए हैं। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर घटिया गुणवत्ता वाले निर्माण और जिम्मेदारों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
प्रदेश सरकार और चितरंगी के स्थानीय जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन सड़क, भवन और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास पर वर्ष 2023 से लेकर अब तक करीब 70 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बगदरा अभयारण्य क्षेत्र की बदहाल सड़कें इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं। बारिश शुरू होते ही बगदरा क्षेत्र मानो टापू में बदल जाता है। ग्राम पंचायत रेही से दीपवा, कुलकवार मुख्य मार्ग और भूर्तिया टोला संपर्क मार्ग जैसे प्रमुख रास्ते पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। सड़कों पर गहरे गड्ढे, जलभराव और फिसलन भरा कीचड़ लोगों की जिंदगी को जोखिम में डाल रहा है।
दोपहिया और चारपहिया वाहनों का संचालन लगभग ठप हो चुका है, जबकि पैदल चलना भी किसी चुनौती से कम नहीं। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में विकास दिखाकर करोड़ों रुपये निकाल लिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर गुणवत्ता को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। हाल ही में बनी कोल्डिहा से खम्हरिया पीसीसी सड़क, जिसकी लागत करीब दो करोड़ रुपये बताई जा रही है, उसमें भी सैकड़ों दरारें पड़ चुकी हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारी निर्माण को सही बताने में जुटे हैं। इस बदहाली का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
वही आरईएस और जनपद चितरंगी के द्वारा पंचायतों में कई सड़क बनाई गई है जो गुणवत्ता को नजर अंदाज किया गया है। ऐसे में विकास बगदरा अभ्यारण में कागजों में ही दफन हो गया है और जिम्मेदार अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि कागजों की प्रगति दिखाकर वाहवाही लूट रहे हैं। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है, गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिम बढ़ जाता है, किसान अपनी उपज बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे और स्कूली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बगदरा क्षेत्र की यह स्थिति साफ बताती है कि विकास के नाम पर सिर्फ कागजी खेल खेला गया है। अब ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है और वे मांग कर रहे हैं कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो और सड़कों का गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए, ताकि विकास केवल फाइलों में नहीं, जमीन पर भी नजर आए।
बगदरा सड़क बदहाली पर पूर्व विधायक ने सरकार को घेरा
बगदरा की बदहाल सड़कों को लेकर पूर्व विधायक का हमला सीधे-सीधे सरकार के विकास दावों की परतें उधेड़ रहा है। करोड़ों रुपये खर्च के आंकड़े गिनाने वाली व्यवस्था अब कीचड़, गड्ढों और टूटे रास्तों के सामने बेनकाब खड़ी है। सरस्वती सिंह ने साफ कहा कि जब 26 पंचायतों के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं, तो यह विकास नहीं, बल्कि कागजी खेल है। बारिश में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं—ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जनता के नाम पर खर्च हुआ पैसा गया कहां?