|
Breaking News
Singrauli News: खैड़ार पंचायत में सरपंच- सचिव ने मिलकर विकास कार्यों के नाम पर किया भ्रष्टाचार भकुआर में 100 ट्रैक्टर बोल्डर का कथित अवैध स्टॉक! NCL के OB से सप्लाई का दावा, नवानगर पुलिस की निगरानी पर बड़े सवालनिगम की फायर ब्रिगेड से भाजपा विधायक की गाड़ी की धुलाई, कमिश्नर आवास पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप, देखें वीडियोवायरल वीडियो में महिला के गंभीर आरोप, एसपी बोले क्रॉस एनसीआर दर्ज; कोतवाली पुलिस की भूमिका पर सवाल बरकरारपीड़ित महिला के संगीन आरोपों से घिरी कोतवाली पुलिस, सोनू पर जिस्मफरोशी और मारपीट कराने के गंभीर आरोपएनसीएल के ओवरबर्डन से बोल्डर चोरी का खेल, नवानगर पुलिस की कथित मेहरबानी से लाखों का कारोबारहोल-पैक के मुहाने पर बोलेरो, NCL के अमलोरी खदान में सुरक्षा नियम ताक पर, हादसे को न्योता देती लापरवाहीपावरग्रिड की टावर लाइन पर किसानों का आक्रोश, भुगतान तय किए बिना जमीन पर काम का दबाव?Singrauli News: खैड़ार पंचायत में सरपंच- सचिव ने मिलकर विकास कार्यों के नाम पर किया भ्रष्टाचार भकुआर में 100 ट्रैक्टर बोल्डर का कथित अवैध स्टॉक! NCL के OB से सप्लाई का दावा, नवानगर पुलिस की निगरानी पर बड़े सवालनिगम की फायर ब्रिगेड से भाजपा विधायक की गाड़ी की धुलाई, कमिश्नर आवास पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप, देखें वीडियोवायरल वीडियो में महिला के गंभीर आरोप, एसपी बोले क्रॉस एनसीआर दर्ज; कोतवाली पुलिस की भूमिका पर सवाल बरकरारपीड़ित महिला के संगीन आरोपों से घिरी कोतवाली पुलिस, सोनू पर जिस्मफरोशी और मारपीट कराने के गंभीर आरोपएनसीएल के ओवरबर्डन से बोल्डर चोरी का खेल, नवानगर पुलिस की कथित मेहरबानी से लाखों का कारोबारहोल-पैक के मुहाने पर बोलेरो, NCL के अमलोरी खदान में सुरक्षा नियम ताक पर, हादसे को न्योता देती लापरवाहीपावरग्रिड की टावर लाइन पर किसानों का आक्रोश, भुगतान तय किए बिना जमीन पर काम का दबाव?

Singrauli News : नो कंडीशन में ठेका, 92 लाख का खेल? स्ट्रीट लाइट घोटाले में फिर घिरी कमिश्नर

दो फर्म संचालकों ने निविदा में अनियमितता का लगाया था आरोप, एसडीओ, इलेक्ट्रिक इंजीनियर की भूमिका पर खड़े हो रहे सवाल

सिंगरौली : नगर निगम कमिश्नर के कार्यकाल में एक के बाद एक उठते भ्रष्टाचार के आरोप थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, और अब 92 लाख के स्ट्रीट लाइट ठेके ने नई आग लगा दी है। नो कंडीशन में दिया गया यह ठेका सीधे तौर पर पारदर्शिता और नियमों पर सवाल खड़े कर रहा है। आखिर किस आधार पर बिना किसी शर्त के इतना बड़ा काम सौंप दिया गया। क्या यह महज लापरवाही है या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है, यही सवाल अब पूरे जिले में गूंज रहा है।

गौरतलब है कि पूरा ठेका नो कंडीशन यानी बिना किसी शर्त के दे दिया गया। अब सवाल यह उठता है कि क्या नगर निगम ने ठेकेदार पर इतना भरोसा किया कि किसी नियम, गुणवत्ता या जवाबदेही की जरूरत ही नहीं समझी गई या फिर मामला कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। दस्तावेज बताते हैं कि भोपाल की मेसर्स एमआर इलेक्ट्रिकल को यह काम महज 0.50% प्रतिशत कम एसओआर पर सौंपा गया। आमतौर पर इतने बड़े प्रोजेक्ट में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है, लेकिन यहां तो जैसे औपचारिकता निभाकर फाइल आगे बढ़ा दी गई।

सवाल यह भी है कि क्या टेंडर प्रक्रिया में वास्तव में प्रतिस्पर्धा हुई या पहले से ही सब तय था। इतना ही नहीं, 78 लाख की अनुमानित लागत अचानक 92 लाख तक पहुंच गई। यानी करीब 14 लाख रुपये का अतिरिक्त उजाला कागजों में ही बढ़ गया। अब यह अंतर कैसे और क्यों हुआ, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है। नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी फिलहाल इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। हैरानी इस बात की हैं कि काम की शुरुआत 23 फरवरी से करना था और 2 महीने में पूरा होना था। यानी 23 अप्रैल तक पूरा काम करना था लेकिन हकीकत में कई इलाकों में आज भी अंधेरा कायम है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि न तो सभी लाइटें लगी हैं और न ही व्यवस्था पूरी तरह चालू हुई है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या काम कागजों में पूरा दिखाकर भुगतान की तैयारी है और अगर ऐसा है, तो आखिर इस भुगतान में किन-किन अधिकारियों को फायदा पहुंचाने वाला है। सूत्र बताते हैं कि स्ट्रीट लाइट टेंडर घोटाले में एसडीओ सहित इलेक्ट्रिक इंजीनियर की भूमिका सवालों के घेरे में है।

दो फर्मों की शिकायत के बाद भी खामोश कमिश्नर

नगर निगम में स्ट्रीट लाइट टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच दो फर्मों द्वारा 2 जनवरी 2026 को कमिश्नर सविता प्रधान से शिकायत की गई बावजूद इसके कोई एक्शन नहीं लिया गया। जहां एक ओर फर्म संचालकों ने निविदा में अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी को लेकर स्पष्ट आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय मौन साधे बैठे हैं। आखिर ऐसी क्या वजह है कि शिकायत के बावजूद कोई जांच या कदम सामने नहीं आया? क्या यह लापरवाही है या फिर किसी बड़े खेल पर पर्दा डालने की कोशिश, यही सवाल अब पूरे मामले को और संदिग्ध बना रहा है।

इनका कहना है

आपके द्वारा जानकारी मिली है कमिश्नर से जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा। यदि टेंडर प्रक्रिया या फिर काम में गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

देवेश पांडे – अध्यक्ष -नगर पालिक निगम सिंगरौली

शेयर करें

सिंगरौली जिले को कौन चला रहा

लेटेस्ट खबरें

संबंधित समाचार