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Singrauli News : पुलिस संरक्षण में फलता-फूलता अवैध अहाता, सरेआम कानून की उड़ रही धज्जियां

कोतवाली के कचनी क्षेत्र का मामला, सैकड़ों लोग खुलेआम बैठकर पीते हैं शराब 

सिंगरौली। एक ओर प्रदेश सरकार अवैध अहातों को बंद करने के सख्त निर्देश दे रही है, वहीं दूसरी ओर कोतवाली क्षेत्र के कचनी क्षेत्र में कानून की धज्जियां सरेआम उड़ाई जा रही हैं। यहां संजीव कुमार केसरी की संचालित लाइसेंसी देशी- विदेशी शराब दुकान के ठीक बगल में अवैध अहाता संचालित हो रहा है, जहां पीली- हरी पन्नी के आड़ में रोज सैकड़ों लोग खुलेआम बैठकर शराब का सेवन करते देखे जा सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ आबकारी विभाग और कोतवाली पुलिस की नाक के नीचे, बल्कि उसके कथित संरक्षण में चल रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब ठेकेदार, आबकारी विभाग और पुलिस के बीच सांठगांठ के चलते यह अवैध अहाता बेखौफ तरीके से संचालित हो रहा है। सड़क किनारे चल रहे इस अवैध अड्डे के कारण आए दिन हादसे का खतरा बना रहता है। नशे में धुत लोग सड़क पर ही लड़खड़ाते नजर आते हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों की मानें तो अहाता खुलने से शराब दुकान की बिक्री कई गुना बढ़ गई है। बैठकर शराब पीने की सुविधा मिलने से ग्राहकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जो इस पूरे खेल के पीछे बड़े आर्थिक लाभ की ओर इशारा करता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार ने अहातों को बंद करने के स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं, तो फिर यह अवैध संचालन आखिर किसके इशारे पर हो रहा है।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि यह अवैध अहाता एसपी ऑफिस से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर संचालित हो रहा है, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या पुलिस प्रशासन को इस अवैध गतिविधि की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर अवैध अहातों का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

अवैध अहाता बना कमाई का जरिया

हैरानी की बात यह है कि एसपी ऑफिस से महज कुछ मीटर की दूरी पर अवैध अहाता धड़ल्ले से संचालित हो रहा है, लेकिन कोतवाली पुलिस को जैसे इसकी भनक तक नहीं। या फिर यूं कहें कि सब कुछ जानकर भी अनजान बनने का खेल जारी है। खुलेआम शराबखोरी, सड़क किनारे हुड़दंग और बढ़ते हादसों के खतरे के बावजूद पुलिस की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर इतनी संवेदनशील जगह पर अवैध गतिविधि कैसे चल रही है। क्या यह लापरवाही है या फिर संरक्षण? यह सवाल अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।

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