सिटाडेल आयुक्त की छाती पर पैर रख करवा लेता है भुगतान ? साहब के सीने में दफन है कई राज

सिंगरौली। परिषद बैठक में आयुक्त का बयान कि स्वच्छता नोडल अधिकारी बनने छाती पर पैर रखकर आदेश करवाने बाले बयान से एक बात तो साबित हो गई है कि स्वच्छता अभियान में नगर पालिका निगम बे हिसाब पैसे खर्च कर रहा। यही वजह है कि हर अधिकारी स्वच्छता का नोडल बनने के लिए वह सारे हथकंडे अपनाता है जो व्यावहारिक तौर पर गलत है। लेकिन सवाल यह है कि स्वच्छता का नोडल अधिकारी बनने के लिए कौन बड़ा अधिकारी या सत्ताधारी नेता है जो आयुक्त को परेशान कर रहा।

गौरतलब है कि नगर पालिक निगम में स्वच्छता में गड़बड़ी की शिकायत दो दर्जन से अधिक पार्षद लंबे समय से कर रहे हैं। पार्षद संतोष साह ने आरोप लगाया कि सिटाडेल कंपनी को प्रतिदिन 10 टन कचरा संग्रहण का वर्क ऑर्डर जारी हुआ, लेकिन 30 टन का भुगतान किया जा रहा है। स्वच्छता के नाम पर हर महीने डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा पैसे खर्च हो रहे हैं। बाबजूद इसके शहर के खाली पड़े प्लांट और नालियां कचरे से अपनी शोभा बढ़ा रहे। कई सालों से मच्छरों से निजात पाने के लिए कई वार्डों में फॉगिंग नहीं हुआ और ना ही नालियों में कीटनाशक डाला गया। लेकिन कीटनाशक खरीदी लगातार होती रही।

पार्षदों के शिकायत पर ना तो आयुक्त और ना ही महापौर ने कभी गंभीरता दिखाई। इसके पीछे वजह क्या रही, यह वही बता सकते हैं। लिहाजा व्यवस्थाएं कई सालों से आज जैसे ही चलती रही। शहर में फैली गंदगी से आमजन मानस त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहा था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और महापौर के कान में जूं तक नहीं रहेगी। हालांकि परिषद में खुद को घिरता देख आयुक्त ने स्वच्छता अभियान में भ्रष्टाचार के कुछ पत्ते खोले जरूर लेकिन कई ऐसे राज है जो अभी भी उनके सीने में दफन है।

सवाल यह है कि कौन अधिकारी और नेता है जो स्वच्छता नोडल अधिकारी बनने के लिए आयुक्त की छाती पर पैर रखकर आदेश करवाता है। अभी तक कितने करोड़ रुपए का बंदरबांट हुआ, पैसों के बंदरबांट में कौन-कौन लोग शामिल हैं।  सिटाडेल पर किस मंत्री का हाथ है जहां से वह दबाव बनवाता है। जैसे कई सवाल लोगों के जहन में उठ रही है।  

पार्षद के आरोप पर आयुक्त बिखरें

वार्ड क्रमांक 42 के पार्षद संतोष शाह ने स्वच्छता अभियान को लेकर कई सवाल किया। उन्होंने सिटाडेल और नगर निगम के बीच हुए कांटेक्ट का कितना पालन हुआ के सवाल पर ही कमिश्नर अपना आपा खो दिए। उन्होंने पार्षद के सवाल का जवाब छाती पर पैर रख जैसे शब्दों के साथ जलेवी जैसे गोल मोल कर बताया। पार्षद ने आरोप लगाया की सिटाडेल कंपनी नगर निगम के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट का पालन नहीं कर रहा। कंपनी को भुड़कुड़, गनियारी, नवजीवन विहार, मोरवा में 20 एकड़ में ग्रीन बेल्ट डेवलप करना था। ताकि क्षेत्र में पर्यावरण का संतुलन बना रहे। पार्षद ने कहा कि वृक्षारोपण में सीटाडेल कंपनी और अधिकारियों ने कई करोड़ रुपए का गोलमाल किया है।

About The Author