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PIU ईई छाती पर पैर रख बने ननि के EE या फिर गांधी जी की रही कृपा ? नहीं बैठते साहब,भगवान भरोसे चल रहा नगर निगम

PIU Executive Engineer : सिंगरौली : नगर निगम कार्यपालन यंत्री व्हीवी उपाध्याय के सेवानिवृत होने के बाद व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चालू रहें इसके लिए पीआईयू ईई प्रदीप चढ़ार को एक सप्ताह पूर्व नगर निगम का प्रभारी कार्यपालन यंत्री नियुक्त किया गया। लेकिन साहब नगर निगम में एक बार मुंह दिखाई रस्म करने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। ऐसे में नगर निगम के विकास कार्य प्रभावित होने लगे हैं। चर्चा है कि क्या कार्यपालन यंत्र बनने के लिए भी अधिकारियों के छाती पर पैर रखकर आदेश कराया गया या फिर गांधी जी का आशीर्वाद रहा।

बता दें कि अधिकारी कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा पीआईयू विभाग के ईई प्रदीप चढ़ार को नगर निगम का अतिरिक्त प्रभार देने के बाद से वह सिर्फ एक बार नगर निगम में कुछ घंटे के लिए बैठे। प्रभार लिए एक सप्ताह हो गया बावजूद इसके उन्हें नगर निगम में बैठने का समय नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में नगर निगम में हो रहे निर्माणकार्यों सहित जनहित के काम प्रभावित होने लगे हैं। वह ना तो स्थल परीक्षण कर पा रहे और ना ही निर्माण कार्यों के भुगतान संबंधी फाइलों देख पा रहे। ऐसे में कई ठेकेदार भी भुगतान को लेकर परेशान है।

बता दें कि पीआईयू विभाग अधिकारी और कर्मचारियों से संबंधित मुद्दों से जूझ रहा है। जिले में पीआईयू को लेकर कई शिकायतें हैं, जिनमें अधिकारियों की लापरवाही, काम में देरी, और भ्रष्टाचार शामिल हैं. कुछ मामलों में, पीआईयू ने निर्माण परियोजनाओं को समय पर पूरा नहीं किया है, जिससे सरकार को नुकसान हुआ है. PIU

छाती पर पैर रखकर बनाया गया प्रभारी

30 मार्च को नगर पालिका निगम के कार्यपालन यंत्री रिटायर्ड होने वाले हैं इस बात की जानकारी सभी को थी। ऐसे में नगर निगम के अधिकारी में कार्यपालन यंत्री बनने के लिए रस्साकसी तेज हो गई थी । इस बीच सत्ता दल के एक नेता ने टंप कार्ड खेलते हुए पीआईयू विभाग के ईई प्रदीप चढ़ार को प्रभारी कार्यपालन यंत्री बनाने का फरमान जारी कर दिया। जिसके बाद कार्यपालन यंत्री बनने का सपना सजोने वाले अधिकारियों पर पानी फिर गया।

बताया जा रहा है कि नवंबर महीने में एमआईसी सदस्यों ने एक प्रस्ताव पारित कर डीके सिंह को कार्यपालन यंत्री बनाने की स्वीकृत दे दी थी। जिसका मिनिट्स भी जारी हो चुका था। लेकिन अब डीके सिंह के सपनों पर पानी फिर गया। वहीं चर्चा है कि क्या कार्यपालन यंत्र बनने के लिए भी अधिकारियों के छाती पर पैर रखकर आदेश कराया गया या फिर गांधी जी का आशीर्वाद रहा।

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