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हाईवे -39 बना खलिहान, सड़क पर सूखता गेहूं और सिस्टम की आंखों पर पट्टी, गडकरी जी ध्यान दें


सिंगरौली: देवसर क्षेत्र में सीधी-सिंगरौली राष्ट्रीय राजमार्ग-39 आज राष्ट्रीय संपत्ति नहीं, बल्कि खुले आसमान का खलिहान बन चुका है। जिस सड़क पर देश की रफ्तार तेज़ होनी चाहिए थी, वहां आज किसानों का गेहूं धूप में पसरा है और भारी वाहन मौत को चकमा देते हुए निकलने को मजबूर हैं। करीब 15 साल से निर्माणाधीन यह फोर लेन सड़क कई जगह आज भी एक ट्रैक में सिमटी हुई है।

स्थिति यह है कि एक लेन के आधे हिस्से पर गेहूं सुखाया जा रहा है और बाकी आधी लेन पर ट्रक, बस, एंबुलेंस और बाइक सवार अपनी जान जोखिम में डालकर गुजर रहे हैं। सड़क हादसों का खतरा हर मोड़ पर मंडरा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मानो अपनी फाइलों के बीच सोए हुए हैं। सड़क निर्माण में तीन ठेकेदार बदले जा चुके हैं, कई बार टेंडर जारी हुए और करोड़ों रुपए खर्च हुए, फिर भी सड़क पूरी नहीं हुई और जिम्मेदारी तय नहीं हुई।

स्थानीय नागरिक और वाहन चालक बताते हैं कि हालात ग्रामीण गलियों से भी बदतर हैं। सुरक्षा के नाम पर न बैरिकेड, न चेतावनी बोर्ड और न कोई ट्रैफिक व्यवस्था है। प्रशासन की यह उदासीनता सवाल खड़ा करती है कि यह सड़क जनता के लिए बनी है या अनाज के लिए। अगर कोई दुर्घटना होती है तो जिम्मेदारी परिस्थितियों पर डाल दी जाएगी।

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे-39 पर ऐसे हालात लंबे समय तक चले तो यह सिर्फ एक सड़क नहीं बल्कि मौत का ट्रैक बन जाएगा। प्रशासन को तुरंत सक्रिय होकर सड़क निर्माण पूरा करना चाहिए और सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। तब तक यह हाईवे यूँ ही खलिहान बना रहेगा और वाहन मौत के मुहाने पर दौड़ते रहेंगे।

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