|
Breaking News
मोबाइल में व्यस्त अफसर, जनसुनवाई में जनता बेबस, सिस्टम पर फिर उठे बड़े सवालरिचार्ज था,टॉकटाइम था ….फिर अचानक कैसे खत्म हुई वैलिडिटी ? सिंगरौली में तबादला खेल ने खोली पोलनिगाही में 32 टन अवैध कोयला बरामद, पुलिस को नहीं लगी भनक, जयंत चौकी तक पहुंची वसूली की चर्चानशामुक्ति मंच पर MLA की जुबान फिसली, बच्चों को दिलाई ‘नशा करने’ की शपथ, VIDEO वायरलसिंगरौली में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई : 2 हजार रिश्वत लेते बीट गार्ड रंगे हाथ गिरफ्तारसिंगरौली महुआ गांव में दरिंदगी: घर में घसीटकर 19 वर्षीय युवती से दुष्कर्म, धमकी के बाद हफ्ते भर चुप रही पीड़ितानगर निगम की नाक के नीचे रोज बर्बाद हों रहा लाखों लीटर पानी, पार्षद बोले- मुझे कभी दिखाई नहीं दिया!मीडिया बैन के पीछे छिपी सच्चाई बेनकाब! SDM के छापे में खुली स्कूलों की पोल, डीईओ की व्यवस्था पर बड़े सवालमोबाइल में व्यस्त अफसर, जनसुनवाई में जनता बेबस, सिस्टम पर फिर उठे बड़े सवालरिचार्ज था,टॉकटाइम था ….फिर अचानक कैसे खत्म हुई वैलिडिटी ? सिंगरौली में तबादला खेल ने खोली पोलनिगाही में 32 टन अवैध कोयला बरामद, पुलिस को नहीं लगी भनक, जयंत चौकी तक पहुंची वसूली की चर्चानशामुक्ति मंच पर MLA की जुबान फिसली, बच्चों को दिलाई ‘नशा करने’ की शपथ, VIDEO वायरलसिंगरौली में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई : 2 हजार रिश्वत लेते बीट गार्ड रंगे हाथ गिरफ्तारसिंगरौली महुआ गांव में दरिंदगी: घर में घसीटकर 19 वर्षीय युवती से दुष्कर्म, धमकी के बाद हफ्ते भर चुप रही पीड़ितानगर निगम की नाक के नीचे रोज बर्बाद हों रहा लाखों लीटर पानी, पार्षद बोले- मुझे कभी दिखाई नहीं दिया!मीडिया बैन के पीछे छिपी सच्चाई बेनकाब! SDM के छापे में खुली स्कूलों की पोल, डीईओ की व्यवस्था पर बड़े सवाल

मोबाइल में व्यस्त अफसर, जनसुनवाई में जनता बेबस, सिस्टम पर फिर उठे बड़े सवाल

सिंगरौली। जनसुनवाई नहीं, मानो मोबाइल सुनवाई चल रही थी। जनता अपनी समस्याएं लेकर दर-दर भटकते हुए यहां पहुंची, लेकिन जिम्मेदार अफसरों को न तो उनकी पीड़ा सुनने की फुर्सत थी, न ही जवाब देने की जिम्मेदारी का एहसास। कुर्सियों पर बैठे अधिकारी फोन कॉल में इतने मशगूल रहे कि फरियादियों की आवाज जैसे उनके लिए मायने ही नहीं रखती। यह दृश्य सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि उस सिस्टम के मुंह पर तमाचा है, जो खुद को जनता का सेवक बताता है।

मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी और जिला परियोजना समन्वयक रामलखन शुक्ला की कार्यशैली ने लोगों को निराश कर दिया। मौके पर मौजूद कई फरियादी अपनी समस्याएं लेकर माननीयों के पीछे इंतजार करते रहे, लेकिन अधिकारियों की व्यस्तता मोबाइल पर ज्यादा दिखी, जनता पर कम। यह नजारा सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जो जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देने का दावा करती है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब शिकायत लेकर पहुंचने पर भी अधिकारी ध्यान नहीं देते, तो फिर ऐसे कार्यक्रमों का क्या औचित्य रह जाता है। सरकारी योजनाओं की समीक्षा और समाधान के लिए बनाए गए इस मंच पर अगर संवाद ही नहीं होगा, तो भरोसा कैसे कायम रहेगा। जानकारों का मानना है कि जनसुनवाई का उद्देश्य प्रशासन और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है, लेकिन जब अधिकारी ही इसमें गंभीरता नहीं दिखाते, तो योजनाओं की सफलता पर भी असर पड़ता है।

यह सिर्फ एक दिन की तस्वीर नहीं, बल्कि उस लापरवाह रवैये की झलक है, जो धीरे-धीरे सिस्टम को खोखला कर रहा है।अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन क्या रुख अपनाता है। क्या जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

शेयर करें

क्या आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर नियम हटाना चाहिए?

लेटेस्ट खबरें

संबंधित समाचार