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मंत्री आईं, समीक्षा की, सवाल आए तो निकल गईं – खाली जयंत चौंकीं पर नहीं दिया जवाब


सिंगरौली । जिले की प्रभारी मंत्री संपत्तियां उइके का दौरा विकास समीक्षा से ज्यादा सवालों से बचने की तस्वीर बनकर सामने आया। कलेक्ट्रेट में डीएमएफ फंड और विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर लंबी बैठक हुई, अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए, लेकिन जैसे ही जमीनी मुद्दों पर सवाल उठा माहौल असहज हो गया। बगदरा में निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और 23 दिनों से खाली पड़ी संवेदनशील जयंत चौकी को लेकर जब पत्रकारों ने सीधे सवाल किए, तो मंत्री जवाब देने से बचती नजर आईं। पहले बिना प्रतिक्रिया आगे बढ़ीं, फिर चलते-चलते औपचारिक जवाब दिए, और आखिरकार तीखे सवालों से बचने के लिए जल्दबाजी में अपनी गाड़ी में बैठकर निकल गईं। इस पूरे घटनाक्रम ने पारदर्शिता और जवाबदेही के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बता दें कि कलेक्ट्रेट में आयोजित समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रभारी मंत्री ने खास तौर पर जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) के फंड के उपयोग को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए और कहा कि अब यह राशि जिले के विकास में ही खर्च होगी। बगदरा क्षेत्र में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी उन्होंने सख्ती की बात कही और घटिया काम करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई के संकेत दिए। लेकिन बैठक के बाहर तस्वीर अलग थी।

बगदरा में सड़कों और अन्य निर्माण कार्यों में अनियमितताओं के आरोप पहले से ही चर्चा में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कागजों में पूरे दिखाए गए कई काम जमीनी स्तर पर अधूरे और निम्न गुणवत्ता के हैं। ऐसे में जब इस मुद्दे पर मंत्री से जवाब मांगा गया, तो स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। उधर, कानून-व्यवस्था का एक बड़ा सवाल भी खड़ा है। उत्तर प्रदेश सीमा से सटी संवेदनशील जयंत चौकी पिछले 23 दिनों से बिना प्रभारी के चल रही है। सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण इस चौकी का खाली रहना प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।

सूत्रों के अनुसार, एक सब इंस्पेक्टर का तबादला रोकने के लिए सियासी और आर्थिक स्तर पर दबाव बनाया जा रहा है, जिसके चलते यह स्थिति बनी हुई है। अब सवाल यह है कि जब एक तरफ भ्रष्टाचार के आरोप और दूसरी तरफ सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चूक सामने है, तो जवाबदेही तय कौन करेगा? मंत्री का यह दौरा विकास से ज्यादा उन सवालों के लिए याद किया जा रहा है, जिनका जवाब अब भी बाकी है।

सियासी दबाव भारी, एसआई तबादला रुकने की चर्चा

एक सब इंस्पेक्टर का तबादला अब प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सियासी ताकतों की परीक्षा बनता दिख रहा है। चर्चा तेज है कि प्रभावशाली रसूख और आर्थिक ताकत के दम पर इस ट्रांसफर को रुकवाने की कोशिशें चरम पर हैं। नतीजा यह कि यूपी सीमा से सटी संवेदनशील जयंत चौकी 23 दिनों से बिना प्रभारी के पड़ी है, लेकिन सिस्टम कार्रवाई के बजाय दबाव में झुका नजर आ रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं? अगर तबादला रुकता है, तो यह सीधे-सीधे प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करेगा और पूरे मामले को सियासी विस्फोट बना सकता है।

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