रवानगी को लेकर रक्षित निरीक्षक का अलग तर्क, दस्तावेजी प्रक्रिया और जमीनी गतिविधियों ने बढ़ाया सस्पेंस
सिंगरौली। पुलिस महकमे में तबादला आदेश की अपनी एक अहमियत होती है, लेकिन जयंत चौकी प्रभारी अरुण कुमार सिंह का मामला इस सामान्य प्रक्रिया से आगे बढ़कर सवालों का विषय बन गया है। तीन जुलाई को सतना तबादला, चार जुलाई को जयंत से रिलीविंग और इसके बावजूद सतना में अब तक आमद नहीं दिए। यह पूरा घटनाक्रम विभागीय प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है। खास बात यह है कि चौकी से रिलीव किए जाने के बाद भी रिजर्व पुलिस लाइन से उनकी रवानगी नहीं होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में अब सरकार की जमकर किरकिरी हो रही है।
मामले में रक्षित निरीक्षक केशव सिंह चौहान से पक्ष जानने पर उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग में अदेय प्रमाण पत्र जमा होने के बाद ही रवानगी की प्रक्रिया पूरी की जाती है। जब उनसे अरुण सिंह का अदेय प्रमाण पत्र जमा होने के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी देखने के बाद ही बता पाएंगे। यही जवाब अब पूरे मामले को और दिलचस्प बना रहा है। सवाल यह है कि यदि प्रमाण पत्र जमा नहीं हुआ है तो इसकी स्थिति क्या है और यदि जमा हो चुका है तो रवानगी अब तक क्यों नहीं हुई?
रिलीव अरुण सक्रिय, जयंत में सरकार की किरकिरी !
जयंत चौकी प्रभारी अरुण कुमार सिंह को तबादले के बाद रिलीव किए एक माह से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन सतना में उनकी आमद और रिजर्व पुलिस लाइन से रवानगी अब भी सवालों में है। दूसरी ओर जयंत चौकी लंबे समय से प्रभारी विहीन है और इसी बीच अरुण सिंह की क्षेत्र में सक्रियता को लेकर चर्चाएं सरकार और पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं। विभागीय प्रक्रिया को लेकर रक्षित निरीक्षक अदेय प्रमाण पत्र का हवाला दे रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि तबादला आदेश और रिलीविंग के बाद रवानगी कब होगी? चौकी खाली और अधिकारी की गतिविधियों की चर्चा से अब सरकार की किरकिरी का कारण बनती जा रही है।
आदेश, रिलीविंग और आमद तीनों की स्थिति साफ हो
पूरे मामले में अब पुलिस विभाग के सामने सबसे बड़ा सवाल पारदर्शिता का है। तबादला आदेश हो चुका, चौकी से रिलीविंग हो चुकी और नई पदस्थापना सतना है, तो फिर रवानगी की प्रक्रिया कब पूरी होगी? यदि अदेय प्रमाण पत्र ही बाधा है तो उसकी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही। जयंत चौकी का यह प्रकरण अब सिर्फ एक अधिकारी की रवानगी तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी सामने है कि पुलिस विभाग में आदेश से लेकर वास्तविक आमद तक की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और जवाबदेह है। फिलहाल अरुण सिंह की सतना आमद और रिजर्व पुलिस लाइन से रवानगी दोनों पर निगाहें टिकी हैं।