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चितरंगी की गौशाला बनी मौतशाला,भूख-प्यास से 3 मवेशियों ने तोड़ा दम

सिंगरौली 7 मार्च। बेसहारा मवेशियों को संरक्षित करने के लिए सरकार ने बड़ी संख्या में गांवों में गौशाला की स्थापना भले करा दी है, लेकिन अनदेखी की वजह से इनमें बंधे बेसहारा और बेजुबान मवेशियों का हाल-बेहाल है। गौशालाओं में बंधे बेसहारा पशु बिना पानी और चारा तथा इलाज के दम तोड़ रहे हैं। इतना ही नहीं मृत पशुओं को दफनाने की व्यवस्था नहीं होने की वजह से भी मृत मवेशियों को पशु आश्रय केंद्रों पर खुले आसमान पर कई दिन पड़े रहते हैं।

बता दे कि जनपद पंचायत चितरंगी के ग्राम पंचायत धानी में गौशाला हैं। यहां अक्सर भूख-प्यास से तड़प-तड़प कर गौवंश की मौत हो रही है। अब एक बार फिर भूख-प्यास और इलाज न मिलने के कारण तीन गौवंश ने दम तोड़ दिया है। गौशाला संचालक करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा तब देखने को मिली, जब गौशाला के अंदर मृत गौवंश दो दिनों से पड़े हैं। इससे तो यही साबित होता है कि गौशाला के जिम्मेदार लोग शायद यहां आते ही नहीं हैं। अन्यथा कम से कम मृत मवेशियों का अंतिम संस्कार समय कर दिया गया होता।

गौशाला की जिम्मेदारी सरपंच व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी की होती है। इनकी निगरानी में गौशाला का संचालन होता है। तो वही गौवंश के संरक्षण की जिम्मेदारी जिला पंचायत सीईओ की होती है, लेकिन जिम्मेदार उगाई-बगही में इतनी मस्त हो जाते हैं कि उन्हें बेजुबानों का दर्द का ऐहसास नहीं होता। तो वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गौवंश की मौत भूख-प्यास और समय पर इलाज न मिलने के कारण हो तो जिम्मेदारों पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्यवाही होनी चाहिए।

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