सिंगरौली। स्कूलों में मीडिया और आम लोगों की एंट्री पर रोक लगाने वाले आदेश को लेकर पहले ही सवालों के घेरे में आई शिक्षा व्यवस्था अब निरीक्षण में मिली खामियों को लेकर फिर चर्चा में है। जिले में औचक निरीक्षण के दौरान 12 अतिथि शिक्षकों पर कार्रवाई ने विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब स्कूलों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी का दावा किया जा रहा है, तो फिर निरीक्षण में लगातार लापरवाही और अव्यवस्थाएं क्यों सामने आ रही हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विकासखंड चितरंगी के विभिन्न विद्यालयों में निरीक्षण के दौरान कई अतिथि शिक्षक अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह पाए गए। कुछ शिक्षक बिना सूचना के विद्यालय से अनुपस्थित मिले, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आई। इसके बाद संबंधित शिक्षकों के खिलाफ जुलाई माह के मानदेय में कटौती और चेतावनी जैसी कार्रवाई की गई है।
निरीक्षण में कुछ शिक्षकों के अध्यापन कार्य को लेकर भी सवाल उठे। दो महिला अतिथि शिक्षकों के संबंध में कक्षा में मोबाइल चलाने, शिक्षण कार्य में रुचि नहीं लेने और विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर कमजोर पाए जाने जैसी टिप्पणियां दर्ज की गईं। विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए चेतावनी जारी की और मानदेय कटौती के निर्देश दिए। लेकिन इस कार्रवाई के बाद अब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ समय पहले स्कूलों में पत्रकारों और आम नागरिकों के प्रवेश को लेकर जारी किए गए आदेश ने पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी थी।
विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला दिया था, लेकिन विरोधियों का कहना था कि इससे स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने आने में बाधा पैदा होगी। अब निरीक्षण में सामने आई कमियों ने उसी बहस को फिर हवा दे दी है। सवाल यह है कि यदि बाहरी निगरानी सीमित कर दी जाए और विभागीय निरीक्षण के बाद भी खामियां सामने आती रहें, तो स्कूलों की जवाबदेही कैसे तय होगी? डीईओ ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे। लेकिन कार्रवाई के साथ-साथ अब शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब भी जरूरी माना जा रहा है।