सिंगरौली : एनसीएल के जयंत खदान में नियम नहीं, बल्कि कथित तौर पर दबंगई का राज चलने के आरोपों ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। डीजीएमएस के सख्त सुरक्षा नियमों को दरकिनार करने के आरोपों में घिरी चड्ढा कंपनी अब सीधे सवालों के कटघरे में है। खदान की जमीनी हकीकत ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जो किसी बड़े हादसे की चेतावनी से कम नहीं है। खदान में संकरी डंपर रोड, जहां भारी-भरकम वाहनों का आमना-सामना जोखिम भरा है; सुरक्षा के लिए अनिवार्य मिट्टी की दीवार का अभाव और उसी रास्ते पर बेरोकटोक दौड़ती प्राइवेट गाड़ियां, मानो नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हों।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रेम प्रकाश सिसोदिया ने खुलकर आरोप लगाया कि बबलू मिश्रा का रवैया अब अतीक अहमद जैसा दबंग हो चुका है। उनका कहना है कि इसी कथित दबंगई के कारण विस्थापित और प्रभावित ग्रामीणों की रोजगार में डाका डाला गया है। पैसे लेकर नौकरी देने के आप पहले भी कई बार लग चुके हैं। इन आरोपों के बीच खदानों का सोशल मीडिया में फोटो और वीडियो जमकर वायरल हुई। जिसमें साफ देखा जा सकता है कि खदान में सुरक्षा नियमों की अनदेखी खुलेआम हो रही है और कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने से बचता नजर आ रहा है।

यह आरोप न सिर्फ खदान प्रबंधन पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चिंताएं पैदा करते हैं। डीजीएमएस के स्पष्ट नियमों के मुताबिक, टू-वे डंपर रोड की चौड़ाई सबसे बड़े डंपर की चौड़ाई का तीन गुना प्लस पांच मीटर होना अनिवार्य है, ताकि भारी वाहनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही, रोड के बीच या किनारों पर पर्याप्त ऊंचाई की मिट्टी की सुरक्षा दीवार बनाना भी जरूरी है, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर खाई में न गिरें। लेकिन जयंत खदान में इन मानकों का पालन होता नहीं दिख रहा, जिससे हर पल दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों और मजदूरों का कहना है कि कई बार इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। प्राइवेट वाहनों की आवाजाही से खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि भारी डंपरों के बीच छोटी गाड़ियों का संतुलन बिगड़ना किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में ये सब चल रहा है और क्यों नियमों की अनदेखी पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। अब यह मामला सिर्फ एक खदान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सुरक्षा मानकों, प्रशासनिक जिम्मेदारी और सिस्टम की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल बन चुका है। अगर समय रहते हालात नहीं सुधरे, तो जयंत खदान किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकती है और तब जिम्मेदारी तय करना सबसे बड़ा मुद्दा होगा।
बबलू मिश्रा के रवैये पर उठे सवाल
लगातार विवादों और आरोपों की परतें खुलने के साथ चड्ढा कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बबलू मिश्रा को लेकर पहले भी सोशल मीडिया में गाली-गलौज का कथित ऑडियो वायरल होने की चर्चाएं रही हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। इसके अलावा एक महिला द्वारा कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर नौकरी के नाम पर पैसों की मांग के आरोप भी लगाए गए थे। अब इन पुराने आरोपों के बीच खदान संचालन में नियमों की अनदेखी के नए मुद्दों ने मामले को और ज्यादा गरमा दिया है, जिससे कंपनी की छवि पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।