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बिना लाइसेंस, बिना कोल वाशरी स्थापित किए भलुगढ़ में कोयले का हो रहा भंडारण ?

खनिज विभाग ने दो महीने पहले पावसुन के कोल वाशरी और रेलवे यार्ड का कोयला किया था सीज, वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर हुई थी कार्यवाही

सिंगरौली : जिले में कोल माफिया इस कदर हावी हैं कि बिना लाइसेंस और बिना कोल वाशरी स्थापित किए कोयले का स्टॉक कर रहे हैं। पिछले दिनों प्रशासन ने भारी मात्रा में कोयले के भंडारण पर कार्यवाही भी की थी। जहां इस भंडारण से जुड़े लोगों ने प्रशासन से कहा था कि आवश्यक दस्तावेज समिट कर देंगे। लेकिन बताया जा रहा है कि अभी तक कंपनी ने कोई दस्तावेज सबमिट नहीं किया है। बावजूद इसके लगातार यहां कोयले का स्टाक किया जा रहा है। चर्चा है कि कोयले के इस कारोबार में राजनीतिक संरक्षण होने के चलते अधिकारी भी कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं।

बता दें कि पिछले दिनों कोयला प्रदूषण की शिकायतों के बाद खनिज विभाग और जिला प्रशासन ने भलुगढ़ स्थित छत्तीसगढ़ की मैसर्स पावसन इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड के कोल वाशरी और रेलवे साइडिंग से जुड़े कोल यार्ड का निरीक्षण किया था। जहां भारी मात्रा में कोयले का स्टाक था। जांच में पता चला कि यह कोयले का भंडारण रेलवे की अनुमति से किया गया है और कंपनी कोयले की लोडिंग कर बाहर भेज रहा है। हालांकि जब जांच टीम ने कोयले से जुड़े दस्तावेज मांगे तो कंपनी के जिम्मेदारों ने कोई भी वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाए।

तात्कालिक अतिरिक्त खनिज अधिकारी विद्याकांत तिवारी ने बताया था कि कंपनी के कर्मचारी आवश्यक दस्तावेज नहीं दिखा पाए। जहां कंपनी का काम रोकते हुए सभी जरूरी दस्तावेज और अनुमतियां प्रस्तुत करने के लिए दो दिन का समय दिया गया है। नहीं देने पर विधि संगत कार्यवाही की जाएगी।

इस कार्यवाही को हुए करीब ढाई महीने से ज्यादा का समय हो गया है। सूत्र बताते हैं कि जांच टीम के दिए हुए निर्धारित समय में कंपनी ने कोल वाशरी और कोल स्टाक के दस्तावेज नहीं दे पाया है। इस संबंध में खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं रिसीव किया। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ स्थित मैसर्स पावसन इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड ने भलुगढ़ में करीब 27 हेक्टेयर जमीन पर प्राइवेट कोल यार्ड बनाया है वहीं कोल वाशरी बनाने का काम प्रगति पर है।

भंडारण के आड़ में रात भर होता है कोयला डंप !

सूत्र बताते हैं की भलुगढ़ स्थित कोल वाशरी और और भंडारण की आड़ में रात को कोयला लेकर गाड़ियां आती हैं। सुबह तक आस-पास गाड़ियां खड़ी रहती हैं। बाहर से गेट बंद कर दिया जाता है। गेट के पास कर्मचारी रखते हैं। पहचान बताने पर ही गेट खोला जाता है। अंदर में मजदूरों से मिलावट का काम कराया जाता है। चर्चा हैं कि रेलवे यार्ड में कोयले की लोडिंग की सुविधा देने के पीछे पूरा खेल किया जा रहा है। यहां स्टाक कोयले का कोई हिसाब किताब नहीं रहता इसीलिए दस्तावेज भी दुरुस्त नहीं रहते।

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