Singrauli News सिंगरौली : नगर परिषद बैठक में कमिश्नर डीके शर्मा चोर है किनारे लगने के बाद अब जितने मुंह उतनी बात हो रही हैं। चर्चा की कमिश्नर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियमों को थोपने सहित कायाकल्प सड़क योजना- 2 के तहत ऐसी सड़कों को जोड़ा गया है जो गारंटी पीरियड में थे।
वही स्वच्छता सहित निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार व जनहित के मुद्दों पर अधिकारियों और महापौर की गैर जिम्मेदाराना रवैया से नाराज पार्षदों ने जमीन पर बैठते हुए कमिश्नर चोर है, मुर्दाबाद करते हुए महापौर के लिए निंदा प्रस्ताव की मांग करने लगे।

चर्चा है कि नगर निगम कमिश्नर भाजपा के चंद पार्षदों पर मेहरबान है और कायाकल्प का 10 प्रतिशत फंड एक ही वार्ड में खर्च कर दिए हैं। ऐसे में 43 वार्डो के विकास कैसे होंगे। वहीं भाजपा के चंद चाहते पार्षदों के बार्डो में कोटेशन के काम हो रहें हैं। कोटेशन के काम जमीन पर नहीं कागजों में होते हैं यह बात हर आम खास समझता है। कोटेशन का काम अधिकारियों और नेताओं के कमाई का जरिया है।
वहीं चहेते पार्षदों की कोई फाइल अधिकारियों की टेबल पर नहीं रुकती। फाइल पहुंचते ही अधिकारी बिना भौतिक परीक्षण किए भुगतान करते हैं। जबकि अन्य पार्षदों के जनहित से जुड़े फाइलों में कमिश्नर के निर्देश पर कार्यपालन यंत्री बीपी उपाध्याय यह कह कर फाइल वापस कर रहे हैं कि वह रिटायर होने वाले हैं।
दूसरी तरफ पूरे शहर में गंदगी का अंबार है, नालियां कचरे से पटी है, कचरा प्लांट के बगल में हजारों टन कचरें का पहाड़ खड़ा है। निस्तारण नहीं हो रहा है बावजूद इसके सिटाडेल कंपनी को भुगतान हो रहा है। इससे नाराज पार्षद कमिश्नर के लिए अभद्र टिप्पणी करने लगे। तो वहीं महापौर के लिए निंदा प्रस्ताव की मांग करने लगें।
हजारों टन कचरा का खड़ा हो गया पहाड़
कचरा प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना करने नवम्बर 2020 में सिटाडेल को काम मिला था। लेकिन कंपनी पूरे कचरे को प्रोसेस करने में विफल रही। घर-घर कचरा का संग्रहण नहीं हो रहा है। कई ऐसे बढ़ है जहां कचरे की गाड़ी आज तक गई नहीं। जबकि नगर निगम के 45 वार्डों में 16 वार्ड ऐसे हैं जो एनसीएल और एनटीपीसी में आते हैं। ऐसे में महज 39 वार्ड में सिटाडेल कंपनी कचरें का संग्रहण करती है। बाबजूद इसके बीजपुर रोड गनियारी में डंपिंग ग्राउंड पर कचरे का पहाड़ बन गया। डंपिंग ग्राउंड में करीब 1000 तन से ज्यादा कचरा पड़ा है। वही कंपनी को करीब एक करोड़ 30 लाख के करीब प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है। कचरा संग्रहण और निस्तारण नहीं होने से पार्षद नाराज थे।
अधिकार क्षेत्र से बाहर नियम थोप रहे कमिश्नर
चर्चा है कि कमिश्नर दया किशन शर्मा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर नियमों को थोप रहे हैं। इतना ही नहीं हुआ है महापौर और अध्यक्ष के बीच हो रही तकरार के पीछे इनका ही हाथ है। कहां जा रहा है कि कमिश्नर महापौर और एमआईसी सदस्यों को इस तरह भ्रमित किया कि नगर सरकार भी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पूर्व कमिश्नर सत्येंद्र सिंह धाकरे कि बिना भ्रष्टाचार की जांच करायें वसूली का आदेश जारी कर दिया। जबकि कमिश्नर पर वित्तीय अनियमितता की जांच सक्षम अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए साथ ही नगर सरकार सिर्फ प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज सकती है। इसके बाद वसूली का निर्णय राज्य सरकारी लेंगी।
चार बार्डो में दिखा रहे दरियादिली
चर्चा हैं कि कमिश्नर भाजपा के चार पार्षदों पर दरियादिली दिखाई रहें हैं । इस मेहरबानी की वजह डर है या कमीशन यह वहीं बता सकते हैं। कमिश्नर वार्ड कमांक 41 पार्षद गौरी अर्जुन दास गुप्ता, वार्ड 31 पार्षद भारतेंदु पांडे, वार्ड 42 पार्षद संतोष शाह ददोली, वार्ड 40 पार्षद सीमा जायसवाल पर मेहरबान है। पूरे परिषद में इन्हीं पार्षदों का दबदबा रहता है और इन्हें बोलने का भी पर्याप्त अवसर मिलता है। इन वार्डो में कोटेशन के काम भी खूब हुए हैं।
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