नवानगर थाना से कुछ दूरी में 32 टन कोयला जप्त, बीट प्रभारी और पुलिस की अनदेखी ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े किए
सिंगरौली जिले के निगाही क्षेत्र में खनिज विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। जहां एक ओर प्रशासन अवैध खनिज कारोबार के खिलाफ सख्ती का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नवानगर थाना क्षेत्र में खुलेआम चल रहे काले कारोबार से पुलिस की दूरी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
गौरतलब है कि सोमवार को खनिज विभाग की टीम ने वन विभाग, एनसीएल सुरक्षा कर्मियों और राजस्व अमले के साथ संयुक्त अभियान चलाते हुए निगाही परियोजना के पास रेलवे लाइन से महज कुछ दूरी पर अवैध रूप से डंप किए गए लगभग 32 टन लावारिस कोयले को बरामद कर जप्त किया। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा अवैध भंडारण नवानगर थाना से चंद किलोमीटर की दूरी पर मौजूद था, इसके बावजूद स्थानीय बीट प्रभारी और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
खनिज विभाग की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया कि जिले में अवैध कोयला कारोबार किस तरह से संगठित रूप में फल-फूल रहा है और जिम्मेदार महकमा आंखें मूंदे बैठा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब इतना बड़ा कोयला भंडारण पुलिस की नजरों से बचा रहा, तो आखिर क्षेत्र में गश्त और निगरानी व्यवस्था किस स्तर की है। जप्त किए गए कोयले को सुरक्षा के लिहाज से मोरवा थाने में रखवाया गया है और खनिज विभाग ने प्रकरण में वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
खनिज अधिकारियों का कहना है कि अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। फिलहाल, इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। खनिज विभाग जहां सक्रियता दिखा रहा है, वहीं पुलिस की निष्क्रियता अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद करने का काम कर रही है। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होती है या मामला हमेशा की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
पोस्टिंग बदली लेकिन नहीं बदला वसूली सिस्टम
नवानगर से तबादला होकर जयंत चौकी पहुंचा पुलिसकर्मी एक बार फिर चर्चाओं में है, जहां पोस्टिंग बदलने के बावजूद उसके काम करने का तरीका नहीं बदला। सूत्रों के अनुसार, अवैध कोयला कारोबार से जुड़ी वसूली का सिलसिला अब भी जारी है और वही पुराने नेटवर्क के जरिए लेन-देन संचालित हो रहा है। इलाके में यह चर्चा जोरों पर है कि स्थानांतरण सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया, जबकि जमीनी हकीकत में सिस्टम जस का तस बना हुआ है। ऐसे हालात पुलिस की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।