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कंप्यूटर ऑपरेटरो के नाम पर संविदाकार और अधिकारियों ने जमकर की धांधली, करोड़ों का किया वारा न्यारा, आयुक्त ने किया बेपर्दा

सिंगरौली।नगर पालिका निगम सिंगरौली में अब कंप्यूटर ऑपरेटरो के घोटाले का बेपर्दा हो रहा है। नगर निगम के अधिकारियों और संविदाकार ने ऑपरेटर के नाम पर जो धांधली की है उसका विगत दिवस आयुक्त ने कंप्यूटर ऑपरेटरो का प्रशिक्षण लेकर खुलासा कर दिया है। ऐसे में यह सवाल उठता है की नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी अपने कारखासों को रखकर सिर्फ नगर निगम के पैसे का दुरुपयोग कर रहे थे और उसके बदले में संविदाकार से जमकर कमीशन खा रहे थे। आयुक्त के प्रशिक्षण में आधे से अधिक कंप्यूटर ऑपरेटर फेल हो गए हैं अब यह देखना है कि 15 दिवस की अवधि दी गई है। क्या उसमें पास हो जाएंगे या फिर अधिकारियों के इशारे पर आयुक्त भी चलेंगे।

नगर निगम सिंगरौली के जुड़े सूत्रों की बातों पर गौर करें तो नगर निगम सिंगरौली के अलावा उप जोन मोरवा व नवजीवन विहार सहित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पास लगभग 40 कंप्यूटर ऑपरेटर की भर्ती की गई है। कई तो ऐसे कंप्यूटर ऑपरेटर हैं जो न नगर निगम में आते हैं और नहीं उप जोन में बैठते हैं। यह कंप्यूटर ऑपरेटर जिम्मेदार अधिकारियों के कार खास कहे जाते हैं। इन्हें सिर्फ इसलिए रखा गया है ताकि अंकगणित को बढ़ाया जा सके। उसके बदले में संविदाकार से भारी भरकम कमीशन लिया जा सके। सूत्र तो यह भी दावा करते हैं कि कंप्यूटर ऑपरेटरो के वेतन की जिम्मेदारी जिस अधिकारी के पास है उस अधिकारी के द्वारा जमकर धांधली की जा रही है। यह पूरा खेल नगर निगम आयुक्त को अंधेरे में रखकर किया जा रहा था।

यह कोई पहला मामला नहीं है कई वर्षों से कंप्यूटर ऑपरेटरो के नाम पर जिम्मेदार अधिकारी नगर निगम के खजाने को लूटवा रहा है। किसी भी आयुक्त की नजर इस और नहीं गई कि। जिन कंप्यूटर ऑपरेटरो को रखा गया है उनके पास तो डिग्री है लेकिन जमीनी स्तर पर कंप्यूटर चलाने की दक्षता नहीं है। यहां तक की आगे से अधिक कंप्यूटर ऑपरेटरो को कंप्यूटर का कोई ज्ञान नहीं है। इसके बावजूद अधिकारियों ने कंप्यूटर चलाने के लिए भर्ती कर लिया है।

अधिकारियों का खेल आयुक्त ने पकड़ीं
कई वर्षों से कई आयुक्त को जिम्मेदार अधिकारियों ने अंधेरे में रखा था। लेकिन आयुक्त डीके शर्मा ने इन अधिकारियों के खेल को आखिरकार पकड़ ही लिया। कुछ जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने कारखास कंप्यूटर ऑपरेटरो को बचाने का प्रयास किया। और इशारों- इशारों में बताया गया था कि आयुक्त के द्वारा सभी चैंबरों का भ्रमण किया जाएगा। इसलिए बच के रहना। लेकिन आयुक्त ने भी कुछ समय लिया और बाद में सभी चैंबरों और कंप्यूटर ऑपरेटरो के प्रशिक्षण लेने लगे। जिन्हें समझाया गया था वही कंप्यूटर ऑपरेटर आयुक्त के प्रशिक्षण में फस गए।

जब कंप्यूटर की जानकारी नहीं तो क्यों रखा
बताया जाता है कि कमिश्नर के द्वारा निरीक्षण किया गया तो आधे से ज्यादा कंप्यूटर ऑपरेटर प्रशिक्षण में फेल हो गए। जहां आयुक्त के द्वारा कहा गया कि इन्हें कंप्यूटर की जानकारी नहीं तो क्यों रखा गया। इन्हें दूसरे काम में लगाओ। जिन्हें बेहतर काम आ रहा है उन्हें जिम्मेदारी दो। या फिर इन्हें 15 दिवस का समय दो ताकि सीख कर आए। नगर निगम के अधिकारियों की पोल कमिश्नर के सामने खुली तो अपने आप को बचाने में जुट गए। यह अधिकारी नगर निगम को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं इसके बावजूद ऐसे बे लगाम अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं हो रही है।

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