MP News : कोटेशन से पार्षदों को मैनेज करने की तैयारी ? आयुक्त और अधिकारी एक दूसरे के भ्रष्टाचार की खोद रहे कब्र

MP News सिंगरौली। परिषद में कल तक आयुक्त डीके शर्मा को चोर और भ्रष्टाचारी कहने वाले पार्षद का अचानक हृदय परिवर्तन हुआ और वह हितैषी बनकर आयुक्त की तरफ खड़े नजर आए। ऐसे में अब सवाल खड़े होने लगे कि आखिर आयुक्त ने क्या ऐसा किया की अचानक पार्षदों का नजरिया बदल गया। इस बीच चर्चा है कि पार्षदों को मैनेज करने के लिए कोटेशन का सहारा लिया जा रहा। कोटेशन से ऐसे काम कराए जाते हैं जो धरातल में नहीं बल्कि कागजों में होते हैं। 

पार्षदों के अचानक आयुक्त के प्रति सहानुभूति बढ़ने से आमजन में चर्चा है कि बाप बड़ा ना भइया ,सबसे बड़ा रुपैया। यह बात इसलिए कहीं जा रही कि पूरे नगर निगम क्षेत्र में सड़क के किनारे खुली सड़कों में कचरा का ढेर है, नालियां कचरे से बजबजा रही, स्वच्छता पर प्रतिमाह 2 करोड रुपए खर्च हो रहे। सीवर लाइन से नई सड़कों का कचूमर निकल गया, सभी वार्डों में धूल का अंबार है, नल जल योजना में लोगों को अमृत जल के नाम पर गंदा पानी पिलाया जा रहा। बावजूद इसके एग्रेसिव पार्षदों का मूड़ पहले के मुकाबले आयुक्त के प्रति नरम क्यों पड़ गया। नरम गरम के बीच अगर कुछ भी यथावत है तो वह नगर निगम वार्डों में अव्यवस्था जिससे हर आम आदमी जूझ रहा है। MP News

अधिकारी और आयुक्त एक दूसरे की खोद रहे कब्र

वही निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी किस कदर हो रही है यह हर आम आदमी जानता है। पार्षद भी कल तक आयुक्त भ्रष्टाचार हैं चोर है जैसे आरोप लगाते थे, लेकिन अब पार्षदों को आयुक्त बेचारे और ईमानदार लगने लगे हैं। अभी तक भ्रष्टाचार के एक भी मामलों की जांच पूरी नहीं हो पाई है, कई मामलों में तो आयुक्त के ऊपर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगे हैं, आयुक्त और अधिकारी एक दूसरे की भ्रष्टाचार की कब्र खोदने में लगे हैं। आरोप है कि आयुक्त उन अधिकारियों की कब्र खोदने में लगे हैं जो उनके भ्रष्टाचार की पोल खोले हैं। इसके लिए उन्होंने पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए कोटेशन का सहारा लिया है। MP News

पार्षदों से मतदाता लेंगे हिसाब

जन प्रतिनिधि के कंधे पर वार्ड के विकास की जिम्मेदारी होती है। वार्ड में सतत विकास की रुपरेखा तय करने के लिए पार्षद को हमेशा सक्रिय रहना चाहिए। लेकिन पार्षद वार्डो की समस्याओं से ज्यादा अधिकारियों को तौलने लगे यानी उनकी खूबियां बताने लगे, तो यह समझा जा सकता है कि पार्षद अपनी जिम्मेदारियां का निर्वहन सही तरीके से नहीं कर रहे। परिषद में सिर्फ सवाल करने तक पार्षदों की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि उन भ्रष्टाचारों को लेकर उन्हें सड़क पर भी उतरना चाहिए। लेकिन हालात ऐसे हैं कि पार्षद अधिकारियों की तारीफ के कसीदे पढ़ते दिख जाए तो हैरानी नहीं होगी। MP News

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