|
Breaking News
ठेकेदार को फायदा पहुंचाने 78 लाख का हुआ स्ट्रीट लाइट टेंडर ?  महापौर का पत्र भी अनदेखावार्ड 40-41 में सफाई के बाद सर्वे, टीम लौटी, नगर निगम कमिश्नर फिर कटघरे में !सिंगरौली में घरेलू गैस के अवैध रिफिलिंग और दुरुपयोग पर छापा,भारी मात्रा में सिलेंडर व मशीनें जब्तSingrauli News : पुलिस संरक्षण में फलता-फूलता अवैध अहाता, सरेआम कानून की उड़ रही धज्जियांSingrauli News : नो कंडीशन में ठेका, 92 लाख का खेल? स्ट्रीट लाइट घोटाले में फिर घिरी कमिश्नरCM साहब! सिंगरौली में सुबह भी ताले में कैद कोतवाली, कोतवाली प्रभारी बेपरवाह या फिर सिस्टम लाचारएक पेड़ की छांव में सिमटी इंसानियत, चारों ओर उजड़ता हुआ सिंगरौलीCM Mohan Yadav का सख्त मूड, 55 जिलों में कभी भी उतर सकता हेलीकॉप्टर, उपार्जन केंद्रों पर मचेगी हलचलठेकेदार को फायदा पहुंचाने 78 लाख का हुआ स्ट्रीट लाइट टेंडर ?  महापौर का पत्र भी अनदेखावार्ड 40-41 में सफाई के बाद सर्वे, टीम लौटी, नगर निगम कमिश्नर फिर कटघरे में !सिंगरौली में घरेलू गैस के अवैध रिफिलिंग और दुरुपयोग पर छापा,भारी मात्रा में सिलेंडर व मशीनें जब्तSingrauli News : पुलिस संरक्षण में फलता-फूलता अवैध अहाता, सरेआम कानून की उड़ रही धज्जियांSingrauli News : नो कंडीशन में ठेका, 92 लाख का खेल? स्ट्रीट लाइट घोटाले में फिर घिरी कमिश्नरCM साहब! सिंगरौली में सुबह भी ताले में कैद कोतवाली, कोतवाली प्रभारी बेपरवाह या फिर सिस्टम लाचारएक पेड़ की छांव में सिमटी इंसानियत, चारों ओर उजड़ता हुआ सिंगरौलीCM Mohan Yadav का सख्त मूड, 55 जिलों में कभी भी उतर सकता हेलीकॉप्टर, उपार्जन केंद्रों पर मचेगी हलचल

सिंगरौली में मजदूर से सरपंच बनी महिला की बढ़ी मुश्किलें, 2 जून को एसडीएम करेंगे सुनवाई

आलेख – कमलेश पांडेय

सिंगरौली : किस्मत कब किसकी चमक जाए कहा नहीं जा सकता, सिंगरौली के ऐसे ही एक गांव में एक दूसरे गांव की महिला मजदूरी करने आई और यहां के वोटर लिस्ट में अपना नाम लिखा लिया। राशन पानी भी मिलने लगा उसकी किस्मत एकदम से बदल गई। लेकिन अब उसकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अब इस मामले की शिकायत के बाद एसडीएम 2 जून को सुनवाई करेंगे, आरोप है कि महिला ने निर्वाचन आयोग को दी झूठी जानकारी दी है।

बताते चलें कि सिंगरौली जिले के गडरिया गांव में साल 2023 के चुनाव में आदिवासी सीट पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च करने वाली पंचायत रही है। गांव में दूसरे गांव से एक मजदूरी का काम करने वाली महिला सरपंच बन गई। पूरा गांव हैरान हो गया। आरोप हैं कि पैसों के दम पर स्थानीय आदिवासी सहित कई लोगों को खरीद लिया। सवाल यह है कि आखिर एक मजदूर के पास इतना पैसा आया कहां से, या फिर किसी ने चुनाव में फंड फाइनेंस किया।

सरपंच सुनीता खैरवार पिता मोतीलाल खैरवार निवासी तेल्दह की पुस्तैनी जमीन पर बारिशाना में नाम है। एक बयान में सरपंच ने कहा है कि मैं चौथी तक पढ़ी हूं लेकिन मुझे लिखना पढ़ना नहीं आता। ऐसे में सवाल उठता है कि महिला के दस्तावेज कौन तैयार करवाया। किसने फर्श से अर्श तक सुनीता को पहुंचाया यह नियम में कितना गलत है। 2 जून के सुनवाई में सामने आ सकता है। शिकायतकर्ता का दावा है कि महिला ने निर्वाचन आयोग को कई झूठी जानकारी देकर चुनाव लड़ी और जीती है।

संबंधित समाचार

यहाँ सर्च करें

शेयर करें

लेटेस्ट खबरें