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Singrauli News: कांग्रेस की निर्माणाधीन कार्यकारिणी, 4 महीने बाद भी नहीं रखी गई नींव

Singrauli News सिंगरौली। चुनाव हारने के बाद जहां कांग्रेस को संगठन मजबूत करने की ज़रूरत थी, वहीं सिंगरौली जिला कांग्रेस कमेटी आज भी “इंतज़ार के मोड” में फंसी है। चार महीने बीत चुके, लेकिन जिला कांग्रेस कार्यकारिणी अब भी न तो बनी, न ही बनने के आसार दिख रहे हैं। लगता है जैसे कार्यकारिणी नहीं, कोई सीक्रेट प्रोजेक्ट चल रहा है—जिसे जनता से छिपाकर रखा गया है।

कागज़ों में जिला अध्यक्ष और ग्रामीण अध्यक्ष तय हैं, लेकिन कार्यकारिणी के नाम पर “फाइल घूम रही है, बस मंज़िल नहीं मिल रही।” दोनों अध्यक्षों का हाल ऐसा है कि वे कार्यकारिणी बनाने से ज्यादा, किसे न रखना है इस टेंशन में पसीना बहा रहे हैं।

गुटबाजी का गणित, एकता सिर्फ भाषण में

सिंगरौली में कांग्रेस की हालत ऐसी है कि हर गुट खुद को असली कांग्रेस मानता है। कोई खुद को “कमलेश्वर पटेल ब्रिगेड” बताता है, तो कोई “आज सिंह राहुल कैम्प” वाला झंडा उठाए घूमता है। कार्यक्रम भी अलग, फोटो भी अलग, और तालियां भी अपने-अपने मंच पर ही बजती हैं। एकता की बात सिर्फ पोस्टर और प्रेस नोट में नजर आती है।

अब जब कार्यकारिणी गठन की बात आई तो “सेवा” नहीं, सीटों की गणना शुरू हो गई—कौन किसका आदमी? किसे जगह मिलेगी? और किस गुट का पलड़ा भारी पड़ेगा? नतीजा—फैसला टलता गया और कांग्रेस की कार्यकारिणी “निर्माणाधीन” श्रेणी में सूचीबद्ध हो गई।

डर भी है… कहीं भूचाल न आ जाए

शहर और ग्रामीण अध्यक्ष कार्यकारिणी बनाने में ऐसे हिचक रहे हैं जैसे उन्हें पता हो कि नाम घोषित होते ही पार्टी दफ्तर नहीं, आपातकालीन बैठकें लगनी शुरू हो जाएंगी। विरोध की आशंका इतनी है कि दोनों नेताओं ने फिलहाल “चुप रहो, टिके रहो” वाली रणनीति अपना ली है। कार्यकर्ता उधर इंतज़ार में हैं, इधर नेतृत्व सोच में—पोस्ट किसे दें ताकि कोई नाराज़ न हो?

नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री का असर

इसी बीच दावे-प्रतिदावे भी तेज़ हो चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष आज सिंह राहुल और क्षेत्र के कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल के समर्थक अपने-अपने लोगों को कार्यकारिणी में सेट कराने के प्रयास में जुटे हैं। फोन कॉल, संदेश, रिश्ते, दबाव—सब कुछ “एक सीट के लिए उचित विकल्प” बन चुके हैं।

जनता को क्या मिला?

कांग्रेस चिन्ह पर वोट देने वाले पूछ रहे—“ये कैसा संगठन चलेगा जहां पद ही तय नहीं पा रहे?” अगर यही स्थिति रही तो आने वाले चुनाव में “मिलेगी कांग्रेस—शर्तों के साथ” वाला नारा चलता दिखे तो आश्चर्य मत कीजिए।

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