आलेख – कमलेश पांडेय
सिंगरौली : किस्मत कब किसकी चमक जाए कहा नहीं जा सकता, सिंगरौली के ऐसे ही एक गांव में एक दूसरे गांव की महिला मजदूरी करने आई और यहां के वोटर लिस्ट में अपना नाम लिखा लिया। राशन पानी भी मिलने लगा उसकी किस्मत एकदम से बदल गई। लेकिन अब उसकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अब इस मामले की शिकायत के बाद एसडीएम 2 जून को सुनवाई करेंगे, आरोप है कि महिला ने निर्वाचन आयोग को दी झूठी जानकारी दी है।
बताते चलें कि सिंगरौली जिले के गडरिया गांव में साल 2023 के चुनाव में आदिवासी सीट पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च करने वाली पंचायत रही है। गांव में दूसरे गांव से एक मजदूरी का काम करने वाली महिला सरपंच बन गई। पूरा गांव हैरान हो गया। आरोप हैं कि पैसों के दम पर स्थानीय आदिवासी सहित कई लोगों को खरीद लिया। सवाल यह है कि आखिर एक मजदूर के पास इतना पैसा आया कहां से, या फिर किसी ने चुनाव में फंड फाइनेंस किया।
सरपंच सुनीता खैरवार पिता मोतीलाल खैरवार निवासी तेल्दह की पुस्तैनी जमीन पर बारिशाना में नाम है। एक बयान में सरपंच ने कहा है कि मैं चौथी तक पढ़ी हूं लेकिन मुझे लिखना पढ़ना नहीं आता। ऐसे में सवाल उठता है कि महिला के दस्तावेज कौन तैयार करवाया। किसने फर्श से अर्श तक सुनीता को पहुंचाया यह नियम में कितना गलत है। 2 जून के सुनवाई में सामने आ सकता है। शिकायतकर्ता का दावा है कि महिला ने निर्वाचन आयोग को कई झूठी जानकारी देकर चुनाव लड़ी और जीती है।