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5 हजार लेकर भी पटवारी नहीं किया सीमांकन, कलेक्टर से कहां RI और नायब तहसीलदार गिद्ध की तरह नोच रहें ?

सिंगरौली। लोकसभा के चुनावी कार्यक्रम को संबोधित करने आए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंच से कहा था कि पटवारी पहले के समय कलेक्टर के बाप होते थे. नामांतरण के लिए किसानों को महीने-महीने चक्कर लगाने पड़ते थे. कलेक्टर की ऐसी व्यवस्था की ऐसी की तैसी, हमने व्यवस्था ही बदल दी. लेकिन सिंगरौली जिले में व्यवस्था नहीं बदल पाएं। यहां के पटवारी, आरआई, नायब तहसीलदार सहित तहसीलदार पर रिश्वत लेकर काम करने के आरोप लगातार लगाएं जा रहें हैं।

मंगलवार की सभी जनसुनवाई में पटवारी और नायव तहसीलदार पर पैसे लेने के बाद भी काम नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत कर्ताओं ने कहा कि राजस्व विभाग में पटवारी आर आई, नायब तहसीलदार, तहसीलदार सहित कंप्यूटर गिद्ध बन गए हैं। हर मामले में पैसे लेकर काम करते हैं जिन फाइलों में पैसे मिल जाते हैं वहां सारे नियम शिथिल हो जाते हैं लेकिन जिन फाइलों में पैसे नहीं मिलते उसे समय इतनी कमियां निकाल देते हैं कि किसान और काश्तकार दम तोड़ने लगता है वह पैसे देने में ही भलाई समझता है।

बता दें कि सिंगरौली के हल्का जरौंधी के काश्तकार से पटवारी रामकृष्ण शुक्ला ने 5 हजार रुपए सीमांकन के नाम पर 8 माह पूर्व लिए थे लेकिन आज तक जमीन का सीमांकन नहीं किया है जिसके चलते पीड़ित ने कलेक्टर के जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।शिकायत कर्ताओं ने कहा कि राजस्व विभाग में पटवारी आर आई, नायब तहसीलदार, तहसील दार सहित कंप्यूटर गिद्ध बन गए हैं। रिश्वत के पैसे लेने के लिए सब ने प्राइवेट दलाल रखे हैं। या फिर अपनी वाहन चालक से वसूली कर रहे है ताकि लोकायुक्त से बचा जा सकें।

तहसील सिंगरौली के ग्राम धतुरा पोखरा निवासी इंद्रजीत कुमार उपाध्याय ने कलेक्टर की जनसुनवाई में आवेदन देते हुए बताया कि आरजी खसरा क्रमांक 318/4, 75/4, 60/4,59/4 की स्थित ग्राम जरौंधी में जमीन का सीमांकन करने का आवेदन बीते 3 जून 2024 को लगाया गया था। लेकिन आज दिनांक तक कोई सीमांकन एवं मापन पटवारी के द्वारा नहीं किया गया है।

पीड़ित ने आगे बताया कि पटवारी के द्वारा बोला गया कि खर्चा लगेगा तभी जमीन की नापी हो पाएगी। पटवारी रामकृष्ण शुक्ला के बताएं अनुसार पीड़ित ने 5 हजार रुपए पटवारी को दिया एवं 2 हजार रुपए कंप्यूटर ऑपरेटर को भी दिया। ताकि जमीन का सीमांकन हो सके। इसके बावजूद पटवारी के द्वारा सीमांकन नहीं किया गया तो पटवारी से मिला। जिस पर पटवारी के द्वारा बार-बार टालमटोल किया जाने लगा।

पीडित से पटवारी ने कहा कि यदि तुम हमको बार-बार बोलोगे तो हम तुम्हारी जमीन नहीं नाप पाएंगे, तुम्हें जहां जाना है वहां जाओ मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है। पटवारी के इस कृत्य से परेशान होकर पीड़ित ने कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचकर पटवारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग करते हुए जमीन का सीमांकन कराए जाने की मांग की है।

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