|
Breaking News
सांप काटने से मासूम की मौत, ट्रामा सेंटर लापरवाही और खराब फ्रीजर ने बढ़ाई मुश्किलेंठेकेदार को फायदा पहुंचाने 78 लाख का हुआ स्ट्रीट लाइट टेंडर ?  महापौर का पत्र भी अनदेखावार्ड 40-41 में सफाई के बाद सर्वे, टीम लौटी, नगर निगम कमिश्नर फिर कटघरे में !सिंगरौली में घरेलू गैस के अवैध रिफिलिंग और दुरुपयोग पर छापा,भारी मात्रा में सिलेंडर व मशीनें जब्तSingrauli News : पुलिस संरक्षण में फलता-फूलता अवैध अहाता, सरेआम कानून की उड़ रही धज्जियांSingrauli News : नो कंडीशन में ठेका, 92 लाख का खेल? स्ट्रीट लाइट घोटाले में फिर घिरी कमिश्नरCM साहब! सिंगरौली में सुबह भी ताले में कैद कोतवाली, कोतवाली प्रभारी बेपरवाह या फिर सिस्टम लाचारएक पेड़ की छांव में सिमटी इंसानियत, चारों ओर उजड़ता हुआ सिंगरौलीसांप काटने से मासूम की मौत, ट्रामा सेंटर लापरवाही और खराब फ्रीजर ने बढ़ाई मुश्किलेंठेकेदार को फायदा पहुंचाने 78 लाख का हुआ स्ट्रीट लाइट टेंडर ?  महापौर का पत्र भी अनदेखावार्ड 40-41 में सफाई के बाद सर्वे, टीम लौटी, नगर निगम कमिश्नर फिर कटघरे में !सिंगरौली में घरेलू गैस के अवैध रिफिलिंग और दुरुपयोग पर छापा,भारी मात्रा में सिलेंडर व मशीनें जब्तSingrauli News : पुलिस संरक्षण में फलता-फूलता अवैध अहाता, सरेआम कानून की उड़ रही धज्जियांSingrauli News : नो कंडीशन में ठेका, 92 लाख का खेल? स्ट्रीट लाइट घोटाले में फिर घिरी कमिश्नरCM साहब! सिंगरौली में सुबह भी ताले में कैद कोतवाली, कोतवाली प्रभारी बेपरवाह या फिर सिस्टम लाचारएक पेड़ की छांव में सिमटी इंसानियत, चारों ओर उजड़ता हुआ सिंगरौली

कोल वाशरी के जहरीले रसायन का सौदागर बना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड!

नवीन मिश्रा

सिंगरौली : एनसीएल ब्लॉक बी परियोजना इलाके में संचालित महावीर कोल वाशरी की मनमानी करीब एक साल से अनवरत जारी है। कोल वाशरी से कोयला युक्त जहरीला रसायन लगातार लोगों के घरों के आसपास और खेतों में बहकर पहुंच रहा है। ऐसे में चर्चा है कि कहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सौदागर बन गया है, और कोल वाशरी से निकलने वाले जहरीले रसायन वाले पानी का सौंदा कर लिया है। शायद यही वजह है कि अधिकारियों को यह मनमानी नहीं दिख रही।

एनसीएल के खदानों के प्रदूषण की मार झेल रहे लोगों के लिए महावीर कोल वाशरी अब नई मुसीबत खड़ी कर दी है। कोल वाशरी को पर्यावरण मंजूरी इसी शर्त पर मिली थी कि क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण, और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए संचालन किया जाएगा। यहां सालाना सैकड़ो करोड़ रुपए के आसपास कारोबार हो रहा है। बावजूद इसके महावीर कोल वाशरी के कर्ताधर्ताओं नें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों और शर्तों को ताक पर रख मनमानी तरीके से काम कर रहे है।

बताया जा रहा है कि स्थानीय लोग कई बार महावीर कोल वाशरी की शिकायत जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से की लेकिन समस्याओं से निजात आज तक नहीं मिल सका। सूत्रों का दावा है कि महावीर कोल वाशरी की पहुंच भोपाल और दिल्ली तक हैं। ऐसे में क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी और जिला प्रशासन के नुमाइंदे अपना कमीशन लेकर मौन धारण किए हुए हैं। प्रदूषण को लेकर एनसीएल सीएमडी भी कागजों में जीरो प्रतिशत पॉल्यूशन का दावा कर खुद की पीठ थपथपा आ रहे हैं।

बिना स्प्रिंकलर के कोयलें की हो रही धुलाई

नियमानुसार कोल वाशरी में कोयला धुलाई के समय स्प्रिंकलर चालू रहना चाहिए ताकि कोयले की डस्ट वातावरण में ना फैलें। लेकिन पूरे इलाके के पेड़ पौधों, मकानों एवं कोल्ड डस्ट से पटी सड़कें देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम एवं शर्तों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा। कोल वाशरी क्षेत्र में कोल डस्ट से वातावरण इस कदर प्रदूषित हो गया कि लोगों को सांस लेना मुश्किल हो रहा।

सूत्रों का दावा है कि जिन अधिकारियों के जिम्मे नियम एवं शर्तों का पालन करने की जिम्मेदारी है वह कोल वाशरी संचालकों से हर महीने लाखों रुपए में सौदा कर लिए हैं। यही वजह है कि जिम्मेदारों को ना प्रदूषण दिखता है और ना ही कोल वाशरी से निकलने वाला जहरीला रसायन युक्त पानी।

संबंधित समाचार

यहाँ सर्च करें

शेयर करें

लेटेस्ट खबरें